संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। अब सरकारी प्राथमिक स्कूलों में रामलीला सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक मंचन तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि बच्चों के भाषा सीखने का माध्यम भी बनेगी। निपुण हरियाणा मिशन के तहत पहली से पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों को रामकथा के छोटे प्रसंगों का मंचन कराया जाएगा।
इसके जरिये बच्चों के सुनने, बोलने, पढ़ने, शब्द पहचानने, सही उच्चारण और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने की क्षमता विकसित करने पर जोर रहेगा।
रामलीला के लिए पांच छोटे प्रसंग सुझाए गए हैं। शिक्षक इनमें से किसी एक का चयन कर बच्चों को तैयार कर सकते हैं। बाल राम कथा पुस्तक का भी सहारा लिया जा सकता है। अभ्यास के दौरान बच्चों को संवाद समझने, पात्र के अनुरूप बोलने, वाक्य और अनुच्छेद पढ़ने तथा कहानी को अपने शब्दों में प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
कक्षा तीन से पांच के विद्यार्थियों को अपेक्षाकृत अधिक बोलने के अवसर दिए जाएंगे। विद्यालयों में तैयारी के दौरान अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों को भी जोड़ा जाएगा। वेशभूषा और मंच सामग्री स्थानीय स्तर पर बिना खर्च तैयार करने पर जोर है ताकि गतिविधि बच्चों की सीख पर केंद्रित रहे। हर विद्यालय को प्रस्तुति का चार से पांच मिनट का लैंडस्केप वीडियो तैयार कर साझा करना होगा।
क्लस्टर, खंड और जिला स्तर पर गठित समितियां इनकी स्क्रीनिंग करेंगी। सर्वश्रेष्ठ तीन प्रस्तुतियों को जिला स्तर पर बुलाया जाएगा। प्रथम पुरस्कार पांच हजार, द्वितीय तीन हजार और तृतीय पुरस्कार दो हजार रुपये निर्धारित हैं। आयोजन व अन्य व्यवस्थाओं के लिए 10 हजार रुपये का प्रावधान है।