जींद। रोहतक रोड की रहने वाली निकी सेहरावत ने मेहनत, लगन और परिवार के सहयोग से खेल जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है। निकी हैंडबॉल में प्रतिभा दिखाने के साथ ही रेलवे में कार्यरत हैं।
निकी के पिता शमशेर सिंह का साया कम उम्र में ही उठ गया था लेकिन माता ने बच्चों के सपनों को टूटने नहीं दिया। निकी बताती हैं कि उन्हें मजबूत बनाने और आगे बढ़ाने में मां ने बहुत त्याग किया है। परिवार के बुजुर्गों का मार्गदर्शन भी उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत बना। निकी ने 2012 से हैंडबॉल खेलना शुरू किया।
पढ़ाई के दौरान कोच राजेंद्र सैनी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और दादा से बात कर खेल में आगे बढ़ने के लिए परिवार का समर्थन सुनिश्चित किया। इसके बाद से परिवार और कोचों का पूरा साथ उन्हें लगातार मिलता रहा। दादा सेवानिवृत्त उप निरीक्षक आजाद सिंह सेहरावत, ताऊ और चाचा ने हर कदम पर उन्हें हौसला दिया।
खेल में ऊंचाई तक पहुंचाने में दिवंगत कोच सतबीर सिंह और कोच चिराग ढांडा की मेहनत और मार्गदर्शन अहम रहा। इनके प्रशिक्षण ने निकी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से खड़ा किया। अपने कॅरिअर में निकी अब तक 40 राष्ट्रीय और 4 अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल मुकाबलों में देश और राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
निकी वर्ष 2021 में भारतीय रेल में चयनित हुईं। निकी तीन भाई-बहन हैं जिनमें निकी और बड़ी बहन हैंडबॉल खिलाड़ी हैं और वर्तमान में भारतीय रेल में कार्यरत हैं जबकि भाई पढ़ाई कर रहा है। निकी सेहरावत की कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और निरंतर मेहनत किसी भी खिलाड़ी को शिखर तक पहुंचा सकती है।