जींद। महर्षि दयानंद योग चिकित्सा आश्रम में मासिक वैदिक सत्संग का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता स्वामी रामवेश ने की। इस अवसर पर मनजीत सिंह शास्त्री, बलवान सिंह आर्य, जोरा सिंह योगाचार्य ने भी अपने विचार रखे।
स्वामी रामवेश ने इस मौसम को किसानों के लिए महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर गेहूं, चना व अन्य फसलें किसान के घरों में आती हैं। अगली फसल जैसे धान, बाजरा, मूंग, मोठ आदि की बिजाई की तैयारी की जाती है। कपास की बिजाई भी चैत्र मास में की जाती है।
सत्संग सभा में प्रस्ताव पास किया गया कि मौजूदा सरकार किसानों की फसल बिजाई के लिए विशेष ऋण उपलब्ध करवाए। इस फसल बिजाई के बाद गन्ना आदि के विकास का भी ख्याल रखा जाता है। भारत में कई तरह की धान की वैरायटी का भी विकास किया गया है, इसलिए सरकार किसानों को एमएसपी देने का प्रावधान करे। इनके साथ ज्यादा देर तक ठगी नहीं करनी चाहिए। आर्य समाज के जोरा सिंह योगाचार्य ने किसानों के हित में विचार रखे।
वेद विद्वान मंजीत सिंह शास्त्री ने बैसाखी पर्व के परंपरा में गुरु परिवार के बलिदान, जलियांवाला कांड के विषय और महिला के संस्कारयुक्त बच्चों के निर्माण और अपने कर्तव्य निर्वहन के विषय में अपना वक्तव्य रखा। स्वामी रामवेश ने कहा कि युवा निर्माण से ही राष्ट्र का निर्माण होगा। इससे ही राष्ट्र उन्नत करेगा और भारत विश्व में अपनी पहचान बनाएगा।
बलवान सिंह आर्य ने भजनों के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हुए कहा कि हम सभी का कर्तव्य बनता है कि सत्संग में ज्यादा से ज्यादा बच्चों को लाने के लिए प्रेरित करें। इससे बच्चों को पूर्वजों और अच्छे संस्कार के साथ जीवन में अच्छी बातें सुनने का मौका मिलेगा।
इस अवसर पर कर्ण सिंह आर्य, दयानंद आर्य, सतबीर सिंह आर्य, आनंद आर्य, रामनिवास आर्य, शमशेर सिंह आर्य, छज्जूराम आर्य, जतिन आर्य, पूजा आर्या, अनामिका आर्या व लता आर्या मौजूद रहे।
14जेएनडी14-मासिक वैदिक सत्संग में विचार रखते हुए स्वामी रामवेश। स्रोत संस्था