संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। संतान की लंबी उम्र और उन्नति के लिए रविवार को महिलाओं ने अहोई माता के व्रत रखा। दोपहर अहोई माता की कथा घरों में हुई और उसके बाद व्रत रखने वाली महिलाओं ने जलपान किया। इस उपलक्ष्य में जयंती देवी मंदिर, माता वैष्णवी धाम समेत कई मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। दिनभर भूखी प्यासी रहकर माताओं ने तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला। व्रत में माताएं संतान की प्राप्ति, संतान की लंबी एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए व्रत रखती हैं। महिलाओं ने पूजा के लिए अहोई और अहोई माता का चित्र खरीदा। अहोई माता की कथा सुनने के बाद सूर्य देवता को पानी दे कथा का पूरा किया।
माता वैष्णवी धाम में सजी-संवरी महिलाओं ने इस अवसर पर विशेष रूप से निर्मित मंडप में प्रतिष्ठित अहोई माता की परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना की व आरती उतारी। अहोई माता से अपनी संतान की दीर्घायु व उन्नति की कामना की। आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि मां एक, मां की ज्योति एक, किंतु मां के स्वरूप अनेक हैं।
प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर पुजारी आचार्य पं. सत्यनारायण शांडिल्य ने बताया कि कार्तिक पास की कृष्णा पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई का व्रत होता है। माताएं अपनी संतान की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखती है। अहोई अष्टमी का विशेष महत्व है। यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि के लिए भी रखा जाता है।
05जेएनडी12 : हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में अहोई माता की कथा सुनती महिलाएं। संवाद
05जेएनडी12 : हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में अहोई माता की कथा सुनती महिलाएं। संवाद
05जेएनडी12 : हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में अहोई माता की कथा सुनती महिलाएं। संवाद