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Jind News: नागरिक अस्पताल में बंदर ही बंदर, 34 बार भेजा रिमाइंडर

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जींद। नागरिक अस्पताल बंदरों के आतंक से मुक्त नहीं हो पा रहा है। स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ द्वारा वर्ष 2020 से लगातार नगर परिषद जींद को पत्र भेज कर बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की बात कही जा रही है, लेकिन अस्पताल बंदरों के आतंक से मुक्त नहीं हो पा रहा है। इस पर संघ द्वारा डीसी के संज्ञान में मामला लाया गया है। अब तक स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ कुल 34वां रिमाइंडर भेज गया है, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों है।
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स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ ने डीसी को दी शिकायत में बताया कि संघ द्वारा वर्ष 2020 से लगातार नगर परिषद को पत्र लिखे जा रहे हैं कि अस्पताल में बंदरों का आतंक है और आए दिन बंदर किसी न किसी को काट रहे हैं। इसके अलावा कार्यालयों के अंदर पहुंच कर भी नुकसान पहुंचा रहे हैं, लेकिन इस समस्या पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। अस्पताल परिसर में बंदरों की संख्या इतनी है कि इन्हें भगाना भी नामुमकिन है। झुंड के झुंड बंदरों के नागरिक अस्पताल में हर समय बैठे देखे जा सकते हैं।
कई बार तो बंदर नागरिक अस्पताल में दाखिल मरीजों के बिस्तर पर पहुंच कर मरीज को घायल कर चुके हैं। अनेक बार कमरों में घुसकर कंप्यूटर समेत नागरिक अस्पताल के रिकाॅर्ड को नष्ट भी कर चुके हैं। इस समस्या के समाधान के लिए कई बार नगर परिषद के अधिकारियों को गुहार लगाई जा चुकी है, परंतु अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। संघ नेता राममेहर वर्मा ने बताया कि उपायुक्त इस मामले में स्व संज्ञान लेते हुए नप अधिकारियों को आदेश दें कि अस्पताल में स्पेशल तौर पर बंदर पकड़ो अभियान चलाया जाए ताकि नागरिक अस्पताल में कार्य करने वाने चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी व आमजन अपने आपको सुरक्षित महसूस कर सकें।
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24 मार्च के बाद नहीं आई बंदर पकड़ने वाली टीम
बार-बार गुहार लगाए जाने के बाद 24 मार्च को बंदर पकड़ने वाली टीम नागरिक अस्पताल आई थी। यहां 15 से 20 बंदर पकड़े गए। टीम सदस्य मनोज ने फिर से आने की बात कही थी, लेकिन टीम दोबारा बंदर पकड़ने के लिए नहीं आई।
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बंदर पकड़ने के मामले में घोटाला होने की बात कही जा रही है। इस मामले की जांच स्वतंत्र जांच एजेंसी विजिलेंस से करवाने के लिए लिखा गया है। बंदर पकड़ने का ठेका जिस एजेंसी को दिया गया था, उसने पांच हजार से ज्यादा बंदरों को पकड़ने की बात कही है। इस मामले में स्वतंत्र जांच एजेंसी से ही जांच करवा कर किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है। शहर को कैटलमुक्त और बंदरों निजात दिलाने के लिए जल्द टेंडर जारी किए जाएंगे।
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मोहम्मद इमरान रजा, डीसी, जींद।
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