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पैसे के लिए अब भी जद्दोजहेद जारी

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कैश प्राप्त करने के लिए लाइन में लगे लोग। - फोटो : bureau
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नोट बंदी के बाद जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, हालात सुधरने की बजाए बिगड़ते जा रहे हैं। पिछले तीन दिन से बैंकों में कैश की दिक्कत चल रही है। सिर्फ एसबीआई, एसबीओपी और पीएनबी जैसे बड़े बैंकों से ही उपभोक्ताओं को कैश मिल रहा है। वहीं एटीएम भी ड्राई हो रहे हैं। बुधवार को जिलेभर की 121 एटीएम में से सिर्फ 32 ही काम कर रहे थे, 89 एटीएम खाली रहे। 32 एटीएम भी दोपहर होते-होते खाली हो गए और लोग नकदी के लिए भटकते रहे। वहीं कोआपरेटिव बैंकों को भी सरकार से सिर्फ एक करोड़ रुपये मिले हैं। जिले में कोआपरेटिव बैंकों की 36 शाखाएं हैं। इससे हर शाखा में दो-तीन लाख रुपये ही पहुंच पाए। वहीं राष्ट्रीय बैंकों को भी एक करोड़ रुपये का कैश ही बुधवार को मिला है। इसमें से करीब 50 लाख रुपये बैंकों को जारी किए गए हैं। शेष राशि बृहस्पतिवार को जारी की जाएगी। तमाम बाजार के साथ-साथ नकदी की कमी से अब निर्माण बाजार भी ठप हो गया है। मारबल और सिनेटरी कारोबारियों के अनुसार 90 प्रतिशत से अधिक काम बंद हो गया है। बाजार में सिर्फ दस प्रतिशत ग्राहक ही बचे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा नोट बंदी की घोषणा किए दो सप्ताह हो गए हैं। कुछ दिन पहले तक लोग हालात सामान्य होने की उम्मीद लगाए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्टा बाजार में मंदी छाई  है। इसका असर करियाणा बाजार से लेकर होटल, सिनेमा और निर्माण उद्योग भी मंदी से जूझ रहा है। स्कीम नंबर पांच में मारबल और सिनेटरी की दुकान चलाने वाले व्यापारी कृष्ण के अनुसार बाजार में महज दस प्रतिशत ग्राहक ही सामान खरीदने आ रहे हैं। भवन निर्माण कार्य लगभग रुका पड़ा है। कुछ लोग पुराने एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट लेकर आ रहे हैं। इससे सामान नहीं दिया जा सकता।


नोट बदलवाने की अंतिम तारीख आज
सरकार के फैसले के अनुसार बैंकों में पुराने एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट सिर्फ 24 नवंबर तक ही बदलवाए जा सकते हैं। शुक्रवार से पेट्रोल पंप, रोडवेज, वीटा बूथ, सरकारी बीज की दुकान सहित कहीं भी पुराने एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट नहीं चलेंगे। इसके बाद पुराने नोट सिर्फ बैंकों में जमा करवाए जा सकेंगे और बैंकों अपने खाते में ही पैसे निकाले जाएंगे। अभी तक कुछ दुकानदार पूरी राशि का सामान लेने में पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट ले रहे हैं, लेकिन शुक्रवार से इस पर पूर्ण प्रतिबद्घ लग सकता है। इसके बाद लोगों की दिक्कत बढ़ने की संभावना है।
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  नोट बदलवाने आए लोगों तोड़ा बैंक का गेट
जुलाना। नोटबंदी के फैसले के 15 दिन बीत जाने पर भी लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सरकार और आरबीआई के करेंसी से संबंधित दावे खोखले नजर आ रहे हैं। एक ओर तो सरकार कह रही है कि करेंसी की समस्या से जल्द ही निजात मिलेगी लेकिन कैश कम होने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ओबीसी बैंक में भारी भीड़ बेकाबू रही पुलिसकर्मियों के भी पसीने छूटते नजर आए। भीड़ ने गेट तोड़ दिया। लोगों का कहना है कि बैंक में कैश कम आ रहा हैं और सुबह 11 बजे ही कैश खत्म हो जाता है। कई बैंक तो कैश नहीं होने के कारण सुस्त रहे। बैंक के आगे लोगों की कतारें सुबह चार बजे लगनी शुरू हो जाती हैं। आलम यह है कि बैंक के कर्मचारियों को भी बैंक के अंदर जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही हैं। करेंसी को जमा करवाने के लिए और साथ ही निकलवाने में जन सैलाब उमड़ रहा है।

बैंक में केवल दो लाख रुपये ही कैश था। जितना भी कैश आ रहा है उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है। उपभोक्ताओं की संख्या ज्यादा है और कैश कम मिल रहा है। अब कैश आने के बाद ही लोगों को परेशानी से निजात मिलेगी। हर उपभोक्ता को केवल दो हजार के हिसाब से पैसे दिए जा रहे हैं।
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- बीएल गांगड प्रबंधक ओबीसी बैंक, जुलाना।

जन धन खातों में नहीं आ रही अधिक राशि
लोग जन धन खातों में अधिक राशि जमा नहीं करवा रहे हैं। यदि कोई आता है तो उसे मना कर दिया जाता है। अधिकतर खातों में दस से 20 हजार रुपये तक ही जमा हुए हैं।
- सुशील कुमार गोसाई, प्रबंधक एसबीआई रोहतक रोड



 
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