अब अनाज मंडी में फसल की बिक्री के बाद किसान को पेमेंट का डर नहीं सताएगा। अनाज मंडी से फसल उठने से पहले ही किसानों के खाते में पैसे आ जाएंगे। साथ ही किसान देश के किसी भी कोने में अपनी मर्जी से फसल को सबसे अधिक दामों पर बेच सकेंगे। सरकार द्वारा अनाज मंडियों को ऑनलाइन कर भारतीय कृषि बाजार से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत जिले में चार अनाज मंडियों को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें जींद, जुलाना, सफीदों व नरवाना की अनाज मंडियों को ऑनलाइन किया जा रहा है। इन अनाज मंडियों में इसी सत्र में धान व कपास की ऑनलाइन खरीद होगी। ऑनलाइन खरीद के लिए ई-एनएएम जीओवी डॉट इन के नाम से साइट बनाई गई है। इस साइट पर फसल की ऑनलाइन खरीद व बिक्री के लिए आढ़तियों व खरीददारों को आईडी व पासवर्ड दिए जा रहे हैं। फसल की खरीद व बिक्री पर नियंत्रण रखने के लिए मार्केट कमेटी सचिव को भी आईडी व पासवर्ड दिया गया है। इससे मार्केट कमेटी सचिव कंप्यूटर पर ही ऑनलाइन पूरा रिकॉर्ड जांच सकेंगे।
ऐसी होगी प्रक्रिया
किसान अपनी फसल लेकर अनाज मंडी पहुंचेगा। मंडी के गेट पर ही ऑनलाइन गेट पास मिलेगा, जिसमें किसान को एक यूनिक नंबर दिया जाएगा। यह यूनिक नंबर दर्शाएगा कि संबंधित जिले की अनाज मंडी में इस किसान की फसल आई है। इसी यूनिक नंबर के आधार पर फसल का लैब में गुणवत्ता का टेस्ट होगा। लैब में किसान या आढ़ती फसल की गुणवत्ता जांच करवा सकते हैं। लैब में गुणवत्ता जांचने के बाद इसे ऑनलाइन कर दिया जाएगा और संबंधित मार्केट कमेटी द्वारा बोली शुरू करने के लिए न्यूनतम मूल्य तय कर दिया जाएगा। इसके बाद देशभर के व्यापारी व खरीददारी ऑनलाइन फसल की बोली लगाएंगे। फसल के बिकने के 24 घंटे के अंदर फसल उठने से पहले फसल को खरीदने वाला किसान ऑनलाइन ही फसल का भुगतान करेगा। खरीददार द्वारा ऑनलाइन भुगतान के बाद संबंधित किसान के खाते में पेमेंट चली जाएगी। साथ ही ऑटोमेटिक तरीके से व्यापारी द्वारा किए गए भुगतान से मार्केट कमेटी के पास फीस व आढ़ती के पास उसका कमीशन चला जाएगा।
मार्केट कमेटी की फीस की चोरी पर लगेगी रोक
ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने के बाद मार्केट कमेटी की फीस चोरी पर भी रोक लगेगी। अकसर आढ़ति उचन्ती पर फसल की खरीद करते हैं, जिससे मार्केट कमेटी की फीस की भी चोरी होती है। ऑनलाइन खरीद शुरू होने के बाद पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन हो जाएगा, जिससे मार्केट कमेटी की फीस की चोरी नहीं होगी।
किसान को मैसेज से मिलेगी भाव की जानकारी
फसल की ऑनलाइन सर्वाधिक बोली लगने के बाद किसान के फोन पर मैसेज आएगा कि उसकी फसल का ये भाव मिल रहा है। इसके बाद किसान लगाए गए भाव से संतुष्ट है, तो हां करके फसल बेचने के लिए स्वीकृति देगा। अगर किसान फसल के मिल रहे भाव से संतुष्ट नहीं है, तो वह मैसेज भेजकर फसल बेचने से इंकार कर देगा। इसके बाद उस किसान की फसल की दोबारा ऑनलाइन बोली लगाई जाएगी।
10 हजार किसान जुड़ चुके हैं ऑनलाइन
जिले में करीब 10 हजार किसानों को राष्ट्रीय कृषि बाजार के तहत ऑनलाइन जोड़ा चुका है। इसके तहत किसानों का बैंक खाता व आधार लिंक किया जाता है। फिलहाल बाकी किसानों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ने के लिए प्रक्रिया जारी है। किसान का आधार व बैंक खाता लिंक होने से उस किसान का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन हो जाएगा। इससे किसान को समय-समय पर देशभर की अनाज मंडियों में फसलों के चल रहे भाव का भी पता लग सकेगा। किसान राष्ट्रीय कृषि बाजार की साइट ई-एनएएम जीओवी डॉट इन पर भी बाजार की जानकारी ले सकेंगे।
किसान व आढ़ती दोनों के हितों का रखा जाए खयाल
ऑनलाइन प्रक्रिया में किसान व आढ़ती दोनों के हितों का खयाल रखा जाना चाहिए। किसान को अगर उसकी फसल का अच्छा भाव मिलेगा, तो इससे आढ़ती को भी फायदा होगा। आढ़तियों से किसानों ने कर्ज लिया है। अगर आढ़ती के पास किसान की फसल नहीं आएगी, तो उस कर्ज का भुगतान कैसे होगा। इसलिए ऑनलाइन प्रक्रिया में आढ़तियों के हितों का भी ध्यान रखा जाए।
मनीष उर्फ बब्लू गोयल, जिला प्रधान
- हरियाणा व्यापार मंडल।
किसान व आढ़ती दोनों के हित होंगे सुरक्षित
अब किसान अपनी फसल का सर्वाधिक मूल्य प्राप्त कर सकेंगे। अनाज मंडी को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ने के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शुक्रवार से अनाज मंडी के गेट पर अपनी फसल लेकर आने वाले किसानों को ऑनलाइन गेट पास दिया जाएगा। इससे एक ओर जहां पारदर्शिता आएगी, वहीं दूसरी ओर किसान व आढ़ति दोनों के हित सुरक्षित होंगे।
- ओमप्रकाश, मार्केट कमेटी सचिव
नई अनाज मंडी, जींद।