जींद। मनरेगा काम न मिलने के विरोध में शनिवार को मजदूरों ने एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने विधेयक की प्रतियां फूंकी और उसके बाद एसडीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर लोकसभा में पारित किए विधेयक को रद्द करने की मांग की।
मनरेगा मजदूर शनिवार को लेबर शैड में इकट्ठे हुए। इसकी अध्यक्षता मनरेगा मेट एवं मजदूर यूनियन हरियाणा के जुलाना तहसील के संयोजक सुरेश करसोला ने की। सीटू के जिला उपाध्यक्ष का. कपूर सिंह ने कहा कि जुलाना ब्लॉक के कई गांवों के मजदूरों ने कानून के अनुसार काम की लिखित मांग की थी।
इसके बावजूद न तो सरकार और न ही ब्लॉक अधिकारी उन्हें काम प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पोली, करसोला, हथवाला, नंदगढ़, लिजवाना कलां सहित कई अन्य गांवों के मजदूरों ने दो महीने से अधिक समय पहले काम की मांग के लिए डिमांड दी थी। मनरेगा कानून के अनुसार 15 दिनों के अंदर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
लेकिन आज तक न काम मिला और न ही बेरोजगारी भत्ता प्रदान किया गया। इससे मजदूरों के परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना में अधिकारी और राजनीतिक दबाव के करीबी लोग मिलकर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार कर रहे हैं, लेकिन इसका खामियाजा ईमानदार मजदूरों और मेटों को भुगतना पड़ रहा है।
उनको काम न देकर सजा दी जा रही है। यह पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। जिला कोषाध्यक्ष पवन कुमार ने बताया कि कल लोकसभा में विधेयक पारित कर दिया। इस विधेयक का विपक्षी पार्टी भारी विरोध कर रही थी, लेकिन बिना किसी की सलाह और बिना संसदीय समिति के यह बिल पारित कर दिया। यूनियन ने इसका पुरजोर विरोध किया और बिल की प्रतियां फूंकी।प्रदर्शन में शामिल ब्राह्मणवास की महिलाओं व मजदूरों ने बताया कि उनके गांव में पीने के पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। पीने का पानी काफी खराब आता है और पाइपलाइन भी टूटी हुई है। पानी की सप्लाई भी आधी रात को आती है। यदि मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज होगा, जिसकी जिम्मेदारी जुलाना एसडीएम की होगी।
किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष वेदपाल ने मनरेगा मजदूरों की मांगों का समर्थन किया और कंधे से कंधा मिलाकर मजदूरों के साथी खड़े होने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर दीनदयाल, गुलाब सिंह, आनंद, रिंकू, चांद, फूल कुमार, कांता, शीला, मूर्ति, गीता, कप्तान, पूजा, पूनम मौजूद रहे।