मालसरी खेड़ा गांव में शुक्रवार को माइनर टूटने से धान की कई एकड़ फसल पानी में डूब गई। नहर के पानी में फसल डूबने से किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इससे किसानों में सिंचाई विभाग के प्रति गहरा रोष पनप रहा है। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।
मालसरी खेड़ा के किसान अजीत, मेहर सिंह ने बताया कि शुक्रवार सुबह जब वो अपने खेतों में पहुंचे तो माइनर टूटी हुई थी। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को इस बारे में सूचित किया लेकिन कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लेटलतीफी के कारण किसानों की कई एकड़ में खड़ी और कटी हुई धान की फसल पानी में डूब गई। बाद में किसानों ने खुद ही माइनर को बंद करने का काम किया।
किसानों ने कहा कि जब किसानों को नहरी पानी की जरूरत होती है उस समय तो माइनर में विभाग द्वारा पानी नहीं छोड़ा जाता लेकिन जब किसानों को पानी की जरूरत नहीं होती विभाग द्वारा उस समय माइनर में पानी छोड़ दिया जाता है। किसानों ने कहा कि धान की फसल की कटाई के साथ ही उन्हें गेहूं की बिजाई करनी थी लेकिन खेतों में माइनर का पानी भर जाने के कारण उनकी धान की फसल तो खराब हो ही गई है साथ-साथ उनकी गेहूं की बिजाई भी लेट होगी। किसानों ने सिंचाई विभाग के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट किया और प्रशासन से मुआवजे की गुहार लगाई।