फोटो 9 नरवाना। यज्ञ हवन करते हुए आर्य समाज के लोग। स्रोत समाज।
नरवाना। आर्य समाज नरवाना में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में सर्वप्रथम पर्यावरण की शुद्धि एवं समृद्धि के लिए यज्ञ-हवन किया गया। इसके बाद वक्ताओं ने वैदिक विचारों और मानव जीवन में प्रकृति के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रधान चंद्रकांत आर्य ने कहा कि उपनिषदों में वर्णित ‘यद् पिण्डे तद् ब्रह्माण्डे, यद् ब्रह्माण्डे तद् पिण्डे के अनुसार मनुष्य के शरीर और ब्रह्मांड का गहरा संबंध है। उन्होंने कहा कि मानव शरीर में पंचमहाभूतों का संतुलन प्रकृति के अनुरूप होता है। ऋषि-मुनियों ने शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक शक्तियों को ब्रह्मांडीय शक्तियों से जोड़कर उनका गहन अध्ययन किया। जयपाल सिंह आर्य ने कहा कि आर्य समाज ज्ञान-विज्ञान आधारित वैदिक शिक्षा के माध्यम से समाज में श्रेष्ठ विचारों को बढ़ावा देता है। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वासों को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मिथिलेश शास्त्री ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने समाज को जागरूक कर स्वाभिमान, स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। उन्होंने उनके विचारों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर वेदपाल, संजीव, कर्ण सहित अन्य आर्य समाज के सदस्य मौजूद रहे।