जींद। लोगों को मतदान करन के प्रति जागरूक करने के लिए रविवार को अमर उजाला की ओर से सुबह छह बजे रानी तालाब से लेकर शहीदी पार्क तक वॉकथॉन का आयोजन किया गया। इसमें कई सामाजिक संगठनों व संस्थाओं के लोगों ने भाग लिया। वॉकथॉन को डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. राजेश भोला और डॉ. रमेश पांचाल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर लोगों को मतदान करने की शपथ दिलाई गई।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. राजेश भोला ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को मतदान के लिए जागरूक करना था। उन्होंने कहा कि हमारा मत हमारा भविष्य तय करता है। मतदान का दिन एक महापर्व है और उसमें हम सबकी सहभागिता जरूर होनी चाहिए। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वह 25 मई को मतदान कर अपना कर्त्तव्य निभाएं और देश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश पांचाल ने कहा कि मतदान करना प्रत्येक नागरिक का सांविधानिक अधिकार है। लिहाजा हर नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए। ऐसा करके हम देश को और मजबूत बना सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम से आमजन को जागरूक करने के साथ विद्यार्थियों को शिक्षित करना चाहिए। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वह अपने आसपास के लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करें। राष्ट्रीय युवा अवार्डी सुभाष ढिगाना, उनकी पत्नी राष्ट्रीय युवा अवॉर्डी एवं हरियाणा पहली सुषमा स्वराज पुरस्कार विजेता मंजू ढिगाना ने भी लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया। राष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी मंदीप कुमार, जींद विकास संगठन के प्रधान राजकुमार गोयल, सेव संस्था के प्रधान नरेंद्र नाडा, टीम जींद सुधार के सुनील वशिष्ठ, चित्रकार दीपक कौशिक, मोहित बब्बर, रंगकर्मी रमेश भनवाला, स्वास्थ्य निरीक्षक राममेहर वर्मा, डीपी राजेंद्र, राजेश वशिष्ठ ने भी लोगों को मतदान करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में टीम जींद सुधार के चंद्र कौशिक, सुशील कुमार,नरेश रानोलीया, खिलाड़ी राम,अमित कुमार, मोनू राम, देव जांगड़ा, राजेश कुमार, जींद विकास संगठन के रोहताश भोला, मनजीत भौंसला, हरेंद्र कादियान, अध्यापक सुनील आर्य, राजेश खर्ब, सुमित काजल, राजेश शर्मा, अंकित देशवाल, विक्की श्योकंद व अन्य मौजूद रहे।
महिलाओं की रही विशेष भूमिका
वॉकथॉन में महिलाओं की विशेष भूमिका रही। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. राजेश भोला की पत्नी सीमा भोला, डीएन मॉडल स्कूल की प्राचार्य लाजवंती ढिल्लों, समाजसेवी सुशील मलिक ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी केवल पुरुषों की नहीं है, इसमें महिलाओं की भी बराबरी की भागीदारी है। कुछ महिलाएं वोट करने नहीं जाती, उनको अपनी ताकत समझनी होगी। आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं।