किसान की मिट्टी की प्रतिमा बनाते कलाकार मास्टर रामकिशन का फाइल फोटो।
जींद। मिट्टी कला से लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दो बार नाम दर्ज करवाने वाले राष्ट्रीय स्तर के कलाकार मास्टर रामकिशन बीमारी के चलते 52 वर्ष की आयु में निधन हो गया। इससे मिट्टी कला जगत को भारी क्षति पहुंची है। मिट्टी कला में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले मास्टर रामकिशन राष्ट्रीय स्तर पर कई बार अपनी अद्भुत कलाकृतियां प्रस्तुत कर चुके थे।
चीन के कलाकार की बनाई गई छह फुट सात इंच की मिट्टी की केतली का रिकॉर्ड तोड़कर रामकिशन ने आठ फुट 9 इंच की केतली बनाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 26 मई 2014 को रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज किया था। 23 दिसंबर 2014 को दो मिनट 23 सेकंड के सबसे कम समय में एक हाथ से मिट्टी का गुलदस्ता बनाकर लिम्का बुक में अपना नाम दर्ज करवाया था। रामकिशन भारत सरकार के खादी बोर्ड मंत्रालय से मान्यता प्राप्त मिट्टी कलाकार थे।
उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) की 36वीं बटालियन में सीमा प्रहरी का सीसी से स्टेच्यू बनाया, जो अब उस बटालियन का लोगो है। इसी प्रकार बिहार के चंपारण जिला में बॉर्डर पर एसएसबी की 21वीं बटालियन में स्टेच्यू बनाकर पूरी सेना का दिल जीत लिया था। इससे खुश होकर सेना सुरक्षा बल के अधिकारियों ने उनको सेना के सर्वोत्तम सम्मान से नवाजा था। इसके अलावा जी-20 में दूसरे देशों से आए मेहमानों को हरियाणा सरकार की तरफ से दिए जाने वाले स्मृति चिह्न में हड़प्पा संस्कृति को दर्शाती मोहरें भी मास्टर रामकिशन ने बनाई थीं। इन स्मृति चिह्नों को तत्कालीन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी में पास किया गया था।
रामकिशन डीएवी कलीराम पब्लिक स्कूल सफीदों में कला अध्यापक थे। उन्होंने अपने जीवन में लगभग 20 हजार से ज्यादा मूर्तियां बनाकर मिट्टी कला में ख्याति प्राप्त की है। मास्टर रामकिशन मात्र 20 सेकंड में भगवान गणेश की मूर्ति बना देते थे, जो अपने आप में एक उपलब्धि थी। परिजनों का कहना है कि सरकार ने इतनी ख्याति प्राप्त कलाकार को कोई आर्थिक सहायता मुहैया नहीं करवाई। यह मलाल उन्हें जीवनभर रहेगा। कई सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है।
किसान की मिट्टी की प्रतिमा बनाते कलाकार मास्टर रामकिशन का फाइल फोटो।