13जेएनडी04: गुरु तेग बहादुर साहिब गुरुद्वारा में पहुंची नगर कीर्तन यात्रा। स्रोत : कमेटी
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जींद। सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर साहिब, भाई दयाला, भाई सती दास और भाई मति दास की शहादत के 350 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर निकाली जा रही विशाल नगर कीर्तन यात्रा शनिवार रात को रानी तालाब स्थित गुरुद्वारा तेग बहादुर साहिब पहुंची। यात्रा का हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य सरदार करनैल सिंह निम्नाबाद की अध्यक्षता में यात्रा का स्वागत किया गया।
इस यात्रा ने रात्रि ठहराव गुरुद्वारा में किया और रविवार को यह यात्रा लाखन माजरा रोहतक के लिए रवाना हो गई। यहां पर मुख्य रूप से गुरुद्वारा मैनेजर गुरविंदर सिंह, हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की पूर्व सदस्य परमिंदर कौर पूर्व सदस्य परमिंद्र कौर और जोगिंदर सिंह पाहवा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेका और यात्रा के साथ चल रहे मौजिज लोगों को सिरोपा पहनाकर सम्मानित किया।
गुरुद्वारा मैनेजर गुरविंदर सिंह ने बताया कि 350 वर्ष पहले दिल्ली के चांदनी चौक में मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर गुरु तेग बहादुर, भाई दयाला, भाई सती दास और भाई मति दास को इस्लाम स्वीकार न करने के कारण शहीद कर दिया गया था। उन्हीं शहीदों की याद में यह नगर कीर्तन यात्रा आनंदपुर साहिब से दिल्ली के चांदनी चौक तक निकाली जा रही है।
उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने धर्म की रक्षा की। औरंगजेब जबरन धर्म परिवर्तन कराना चाह रहा था। उसने तरह-तरह के प्रलोभन, तरह-तरह के अत्याचारों के जरिए गुरु तेग बहादुर पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया लेकिन गुरु तेग बहादुर ने उनका डटकर मुकाबला किया और धर्म की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य सरदार करनैल सिंह निम्नाबाद ने कहा कि यह यात्रा हिंदू, सिख एकता की प्रतीक है और शहीदों की बलिदान गाथा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। विश्व इतिहास में धर्म व मानवीय मूल्यों, आदर्शों व सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहिब का स्थान अद्वितीय है। उनकी शहादत दुनिया में मानव अधिकारों के लिए पहली शहादत थी। इसलिए उन्हें सम्मान के साथ हिंद की चादर भी कहा जाता है।
13जेएनडी04: गुरु तेग बहादुर साहिब गुरुद्वारा में पहुंची नगर कीर्तन यात्रा। स्रोत : कमेटी- फोटो : mathura