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दो दिन पहले जुलाना से लापता युवक का मदीना में मिला शव, पुलिस की लापरवाही पर शहर में हंगामा

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 एक युवक की मौत के मामले में पुलिस की लचर कार्रवाई पर हंगामा हो गया। युवक के लापता होने के बाद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और शव मिलने के बाद भी हत्या का केस दर्ज नहीं किया गया। आरोपी युवक पर केस दर्ज करने की मांग करते हुए परिजन और दलित समाज के लोग बिफर पड़े। परिजनों ने पीजीआई के पोस्टमार्टम हाउस से लेकर पीजीआई मोड़ तक जाम लगा दिया। मेडिकल मोड़ पर जाम लगते ही शहर की लाइफलाइन थम गई और वाहन ज्यों के त्यों फंस गए। इतना ही नहीं जाम में फं से कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर जब परिजनों को समझाने पहुंचे तो परिजनों ने उन्हें भी दो टूक जवाब देकर लौटा दिया। जैसे-तैसे करके स्थानीय पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर बरौदा थाने में मामला भेज दिया। इसके बाद जाम खोला गया। सुबह साढ़े 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक लगे जाम से आधा शहर थम गया। वाहनों को मॉडल टाउन से डायवर्ट कर जैसे-तैसे निकाला गया। कई प्रदर्शनकारी महिलाएं बेसुध हो गईं और पुलिस से हाथापाई भी की गई।
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जुलाना स्थित गांव मेहरड़ा निवासी 27 वर्षीय सुनील को 31 जुलाई को उसी के गांव का एक युवक घर से बुलाकर ले गया था। गांव के युवक का दावा था कि वह मजदूरी के लिए जा रहे हैं। इसके बाद सुनील शाम तक घर नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। सुनील के परिजनों ने सुनील को साथ ले जाने वाले युवक से बात की तो वह टालमटोल करता रहा।
दो दिन बाद नहर में मिला शव तो हुआ खुलासा
दो दिनों तक सुनील के परिजन उसकी तलाश करते रहे। परिजनों ने नहर में भी सुनील की तलाश की। आरोप है कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई नहीं की। दो अगस्त को महम के गांव मदीना के  पास नहर में सुनील का शव मिला। परिजनों ने गांव के उस युवक पर आरोप लगाया कि आरोपी ने उनके बेटे की हत्या कर शव को नहर में फेंक दिया है। मंगलवार को जुलाना थाने से जीरो एफआईआर कर बरौदा थाने में भेज दी गई। क्योंकि परिजनों ने जिस जगह पर बेटे को ले जाने का आरोप लगाया है, वह जगह बरौदा थाने में पड़ती है। बुधवार को मृतक के परिजन शव को लेने के लिए पीजीआई पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। परिजनों ने पुलिस को शिकायत देकर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की। आरोप है कि बरौदा पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके विरोध में सैकड़ों ग्रामीण और मृतक के परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। उन्होंने पोस्टमार्टम हाउस से प्रदर्शन शुरू कर मेडिकल मोड़ पर जाम लगा दिया।
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5 बार रोकने का प्रयास, परिजनों के गुस्से के आगे बेबस पुलिस
पुलिस ने पोस्टमार्टम हाउस से रवाना होते ही ग्रामीणों को सबसे पहले पोस्टमार्टम हाउस मोड़ पर रोकने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस सफल नहीं हो सकी। मेडिकल मोड़ तक ग्रामीणाें को पांच बार रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन परिजनों के गुस्से के आगे पुलिस बेबस नजर आई। कई जगहों पर परिजनों और पुलिस के बीच जमकर नोकझोंक हुई। कई पुलिस अधिकारियों के साथ धक्कामुक्की भी हुई। एसएचओ कुलदीप के साथ लोगों ने अभद्रता भी की।
महिला सड़क पर लेटीं तो पुरुष धरने पर बैठे
पुलिस ने लोगोें को रोकने का प्रयास किया तो महिलाएं सड़क पर लेट गईं तो पुरुष सड़क पर धरना देकर बैठ गए। फिर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। एक घंटे तक अशोका चौक से लेकर मेडिकल मोड़ तक दोनों तरफ का रोड जाम रहा। सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई एंबुलेंस भी जाम में फंसी रही। मामला बढ़ता देख डीएसपी विजय सिंह, वीरसिंह और पीजीआई थाना प्रभारी कुलदीप सिंह टीम सहित मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने जीरो एफआईआर दर्ज करने का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद दोपहर 1 बजे जाम खोला गया। बीमार बंदियों की गाड़ी भी जाम के कारण पीजीआई तक नहीं पहुंच सकी। एसएचओ कुलदीप का कहना है कि जीरो एफआईआर दर्ज कर बरौदा पुलिस को भेज दी गई है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष व विधायक दल की नेता जाम में फंसे
दिल्ली की तरफ से आ रहे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर और कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी का काफिला शहर की तरफ आ रहा था। जाम लगा देखने के बाद दोनों नेताओें ने परिजनों की मांग पूरा करने का आश्वासन देकर जाम खोलने की अपील की। लेकिन परिजनों ने दोनों की एक भी बात नहीं सुनी। इसके बाद दोनों अपनी गाड़ी में जाकर बैठ गये। जाम खुलने के बाद ही नेता रवाना हो सके।
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