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प्रशासन की अनदेखी का शिकार मालवी, समाधान के लिए ग्रामीण से लेकर मंत्रियों तक लगाई गुहार, नहीं हुआ समाधान

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मालवी गांव में कीचड़ से लबालब गली दिखाते हुए ग्रामीण। संवाद - फोटो : Jind
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जुलाना। मालवी गांव जिले से जितनी दूर है उतनी ही विकास से दूर हैं। गांव में कीचड़ से लबालब गलियों ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार के रवैये को लेकर नारेबाजी करते हुए रोष प्रकट किया। ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत विभाग और मंत्रियों तक लगाई, लेकिन कोई भी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों को आज तक आश्वासन के अलावा सुधार के लिए कुछ नहीं मिला।
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ग्रामीणों ने बताया कि गलियों में कीचड़ के अलावा भी कई तरह की गंभीर समस्याएं हैं। गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो बना हुआ है, लेकिन उसमें सुविधा नाम की कोई चीज नही हैं। गांव में रोडवेज बस नहीं होने के कारण छात्राओं को काफी परेशानियों से होकर गुजरना पड़ रहा है। दो अंतरराष्ट्रीय खिलाडिय़ों और दो शहीदों की शहादत के बावजूद गांव का विकास नहीं करवाया गया है। गांव में समस्याओं की भरमार है। गांव की आबादी लगभग 15 हजार है।
गांव की दो महिला खिलाड़ियों ने किया गांव का नाम रोशन
जुलाना क्षेत्र के मालवी गांव की डब्लू डब्लू ई रेसलर कविता दलाल ने विदेशों में भी देश का नाम रोशन करने का काम किया वहीं दूसरी ओर वेटलिफ्टिंग में कई कीर्तिमान अपने नाम किए। कविता दलाल भारत की पहली रेसलर महिला तो बन गई लेकिन गांव का विकास नही हो पाया।
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शहीदों की शहादत भी नही पहुंचा पाई विकास तक
मालवी गांव के शहीद भीम सिंह ने कारगिल युद्ध में देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था तो दूसरी और शहीद मनबीर ने भी देश की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए थे। सरकार द्वारा कोई मदद नहीं मिलते देख परिजनों ने अपने पैसों से ही शहीद स्मारक बनाने का काम किया। शहीदों के शहीदी दिवस पर अधिकारी आते हैं और परिजनों व ग्रामीणों को आश्वासन देकर चले जाते हैं। अभी तक किसी ने भी विकास के नाम पर गांव में कोई भी काम नही करवाया है।
गांव में विकास कार्यों की दरकार है। कई बार इस संबंध में अधिकारियों से मिला जा चुका है लेकिन कोई भी समाधान नहीं हो पाया है। गांव में कच्ची गलियां, जर्जर मकान गांव की दशा बता रहे हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी या नेता गांव की सुध नहीं ले रहा है। गांव पहुचने पर ऐसे नेताओं का विरोध किया जाएगा।
- धर्मेंद्र पहलवान, ग्रामीण।
गांव में रोडवेज बस नही चलने से छात्रों को काफी परेशानियों से होकर गुजरना पड़ रहा है। कई बार इस संबंध में रोडवेज जीएम और उपायुक्त से भी मिला जा चुका है लेकिन कु छ दिन के बाद फिर से बस को बंद किया जा रहा है। ऐसे में इसका सीधा असर ग्रामीणों की जेब पर पड़ रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द रोड़वेज बस को चलाया जाए।
-सतबीर दलाल, ग्रामीण।
गांव में कहने का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो बनाया गया है, लेकिन सुविधा नाम की कोई चीज नहीं है। ग्रामीणों को जींद या रोहतक की ओर रुख करने को मजबूर करना पड़ रहा है या फिर निजी अस्पतालों में ईलाज के लिए जेब ढ़ीली करनी पड़ रही है।
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-राजेंद्र ग्रामीण।
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