जींद। पंथ जैन स्थानक उचाना मंडी में अनुराग मुनि ने कहा कि अपने बच्चों को बेहतर परवरिश करना माता-पिता का फर्ज है। बच्चों को पढ़ा, लिखा कर उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर बनाना भी पिता का ही फर्ज है। इससे भी बड़ा फर्ज है उन्हें एक अच्छा इंसान बनाना। एक ऐसा इंसान जो इंसानी मूल्यों की बेहतर कद्र करना जानता हो। एक ऐसा इंसान जो बचपन में परवरिश करने वालों की बुढ़ापे में परवरिश करना जानता है।
अभिषेक मुनि ने मनुष्य का अच्छा स्वास्थ्य किस प्रकार से बनने के बारे में श्रद्धालुओं को बताते हुए कहा कि जिसका स्वास्थ्य सही नहीं है वो ना तो मोक्ष प्राप्त कर सकता है ना ही धर्म कर सकता है ना ही रिश्ते निभा सकता है ना ही काम कर सकता है।
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प्रभु महावीर कहते है कि यदि आपका पैसा गया तो कुछ नहीं गया यदि आपका स्वास्थ्य गया तो सबकुछ चला गया। जीवन के अंदर ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए। चिंता चिता के बराबर है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए चार नियम बताते हुए कहा कि पहला जीवन में ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए। दूसरा अपने शरीर की चर्बी को कम करना चाहिए।
सोशल मीडिया ने हमारे शरीर का नाश कर दिया है। जो सुबह का समय व्यायम, घूमने के लिए बनाया गया तो आजकल लोग उस को समय मोबाइल देखने में खराब कर देते है। तीसरा मीठा, चौथे चटपटा भोजन खाने से बचे। जैसा मनुष्य खाता है अन्न वैसा बनता है मन। जैसा बनेगा मन वैसा रहेगा तन।