प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर बृहस्पतिवार को लघु सचिवालय के सभागार में डीसी विनय सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में उप कृषि निदेशक प्रदीप मिल समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि फसल बीमा योजना के तहत किसान को फसल में नुकसान होने की सूरत में मुआवजा दिया जाएगा। किसान को नुकसान की सूचना तुरंत बीमा कंपनी डीआरओ कार्यालय या कृषि विभाग के कार्यालय को देनी होगी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ अधिकाधिक किसान उठा सके, इस उद्देश्य के दृष्टिगत गांव में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
उप कृषि निदेशक प्रदीप मिल ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए वरदान साबित होगी। इस योजना के तहत खरीफ सीजन की कपास, धान, बाजरा तथा मक्का व रबी सीजन की गेंहू, जौ, सरसों तथा चने की चार-चार फसलों का बीमा किसान करवा सकते हैं। इस बीमा योजना के तहत किसान अपनी फसलों का बीमा 31 जुलाई तक करवा सकते हैं। जिन किसानों ने बैंकों या सहकारी समितियों से ऋण लिया है, उन किसानों को फसलों का बीमा करवाना अनिवार्य है। अन्य किसान अपनी इच्छा के अनुरूप फसलों का बीमा करवा सकते हैं।
बैंकों में जाकर सी फार्म जमा करवाएं
जिन किसानों ने बैंकों व सहकारी समितियों दोनों से ऋण लिया है, उन किसानों को किसी एक संस्था में जाकर सी फार्म भरकर देना होगा। इस सी फार्म के साथ किसान को एक शपथ पत्र भी देना होगा, जिसमें खेत में किस फसल की बिजाई की गई है। इस संबंध में पूरी जानकारी देनी होगी। किसान द्वारा दिया गया शपथ पत्र के हिसाब से ही फसल का मुआवजा उपलब्ध करवाया जाएगा। एक हैक्येटर गेंहू की फसल का बीमा 825 रुपये, कपास की फसल का बीमा प्रति हैक्टेयर 1200 रुपये के प्रीमियम पर करवाया जा सकता है। प्रति एकड़ धान की फसल का बीमा 1250 रुपये प्रति एकड़, एक एकड़ मक्का की फसल का बीमा 500 रुपये में तथा 550 रूपए में एक एकड़ बाजरे की फसल का बीमा करवाया जा सकता है।