जींद। विशेष गहन पुनरीक्षण को रद्द करने, चुनाव आयोग की स्वतंत्र एवं लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने की मांग को लेकर शनिवार को वामपंथी पार्टियों ने आंबेडकर चौक, रानी तालाब पर धरना दिया। धरने के बाद कार्यकर्ताओं ने शहर के बाजारों में प्रदर्शन करते हुए मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।
धरने की अध्यक्षता सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता का. प्रकाश चंद्र ने की, जबकि संचालन जिला सचिव का. कपूर सिंह ने किया। सीपीआई(एम) राज्य सचिव मंडल सदस्य का. रमेश चंद्र और सीपीआई (माले) के राज्य सचिव का. विनोद ने कहा कि मताधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। उन्होंने एसआईआर को रद्द करने और जिन पात्र नागरिकों के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं उनके मताधिकार बहाल करने की मांग की।
उन्होंने 23 सितंबर को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग के भीतर एसआईआर और मतदाता सूची से संबंधित कुछ निर्णयों को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 मौकों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने इन नोट्स के अस्तित्व को स्वीकार करते हुए कहा था कि अलग-अलग विचार निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
वामपंथी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने तथा चुनाव आयोग की स्वतंत्र, निष्पक्ष और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि आयोग संविधान द्वारा स्थापित स्वतंत्र संस्था है और उसकी निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा सामूहिकता होनी चाहिए। प्रदर्शन में सुधीर शास्त्री, मा. बलबीर सिंह, डिंपल, सतबीर खरल, चांद बहादुर, बलिंद्र, नरेश दनौदा, संदीप जाजवान, नूतन प्रकाश, मुरारी लाल, जोगिंद्र, राजेश कुमार, पवन कुमार, रणबीर सिंह, आजाद पांचाल, सुरेश करसोला, बिट्टू, राजकुमार श्योकंद, सुभाष पांचाल, सुल्तान जांगड़ा मौजूद रहे।