शहीद कैप्टन पवन का सोमवार को गांव बाधना में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। शहीद बेटे को अंतिम विदाई देने के लिए पूरा गांव जुटा। पिता राजबीर की आंखें नम थी, लेकिन सीना गर्व से चौड़ा था। वे बोले एक और बेटा होता तो उससे भी आज देश की सेवा करने के लिए भेजता। उनका इकलौता बेटा देश के लिए देश की सेवा करते हुए शहीद हुआ वह उनके लिए गौरव की बात है।
शिक्षक राजबीर सिंह ने बताया कि 5 जनवरी 1993 को जन्मे पवन कुमार ने 14 दिसंबर 2013 में सात डोगरा रेजीमेंट में कमीशन मिला था। नेशनल डिफेंस एकेडमी एनडीए से टाइअप के तहत उन्हेें जेएनयू से डिग्री ली। इसके बाद पवन ने बतौर पैरा कमांडो 10 पैरा रेजीमेंट ज्वाइन की। शहादत से पहले कैप्टन पवन ने कश्मीर में ही आतंकियों के खिलाफ सफलतापूर्वक दो ऑपरेशन किए। इनमें तीन आतंकवादी ढेर हुए थे।
मां ने कहा, मैं करड़ी हूं बस बेटे का दुख तो होता ही है
इकलौते बेटे के शहीद होने के बाद भी पवन कुमार के माता-पिता ने हौसला नहीं तोड़ा। आस पड़ोस की महिलाएं जब पवन की मां कमलेश देवी को ढाढस बंधाने पहुंची तो उन्होंने कहा, मैं करड़ी हूं, बस बेटे के जाने का गम होता ही है।’ जिस समय लोग अर्बन एस्टेट स्थित निवास पर शहीद पवन के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहे थे, उनके पिता राजबीर पत्नी कमलेश देवी के पाए गए और कहा कि जैसे ही बेटे का शव आए रोना मत, नहीं तो इस कुर्बानी का कोई फायदा नहीं होगा।
चिकित्सकों से भी कहा मैं ठीक हूं
शहीद पवन का शव पहुंचने से पहले सामान्य अस्पताल के चिकित्सकों की एक टीम पवन की मां के स्वास्थ्य की जांच करने पहुंची। जैसे ही चिकित्सक ने रक्तचाप जांचना शुरू किया शहीद पवन की मां ने कहा कि उसे कोई दिक्कत नहीं है। बस मां होने के नाते बेटे का गम है। उसे अपने सपूत पर गर्व है।
भाई को कहा भांजे का शव देख कर रोना नहीं
जिस समय पूरा परिवार शहीद के पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहा था, शहीद पवन की मां ने अपने भाई को बाहर से बुलाया और कहा,पप्पू अपने भांजे के शव को देखकर रोना नहीं। उसकी आत्मा को बहुत बुरा लगेगा।’
मां को किया वादा नहीं निभा सका पवन
शहीद पवन की मां के अनुसार पवन जब भी छुट्टी आता, उसे पूरे देश में घुमाने की बात कहता था। हर वक्त मां को गोद में उठाए रहता था, लेकिन पवन मां को पूरा देश घुमाने का वादा पूरा नहीं कर पाया। पवन अंतिम बार नौ जनवरी को छुट्टी आया था और 18 जनवरी को वापस चला गया। तीन दिन पहले फोन पर अपनी मां से बात हुई, जिसमें उसके एक साथ के छुट्टी आने का जिक्र करते हुए शहीद पवन ने खाने का सामान मंगवाया था। पवन के साथी को वापस तीन मार्च को लौटना था, लेकिन इससे पहले ही पवन देश के लिए शहीद हो गया।
मुझे अपने बेटे पर नाज
शहीद कैप्टन पवन की मां शिक्षिका कमलेश देवी ने कहा कि उसका बेटा बहुत ही दिलेर था। मुझे अपने बेटे पर नाज है। उस पर देश सेवा का जुनून था। अपनी बहादुरी और दिलेरी के चलते ही पवन इतने कम समय में पैरा कमांडो के लिए सेलेक्ट हुए थे। इसमें सेना की रेजीमेंटों से चुनिंदा अफसर ही जगह बना पाते हैं।
आज पवन कुमार जैसे जाबांज देशभक्तों की बदोलत ही हम स्वतंत्र वातावारण में जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरा देश व प्रदेश इस जाबांज देशभक्त को नमन करता है। हरियाणा के जवान देश की सीमाओं की रक्षा करने में अग्रणी पंक्ति में रहे हैं। शहीद पवन कुमार जैसे अमर शहीदों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
सुभाष बराला, प्रदेशाध्यक्ष भाजपा
आज ऐसे समर्पित देशभक्तों के बलिदानों की बदौलत ही हम सुरक्षित हैं। देश के लोग इनकी शहादत को प्रणाम करते हैं। आने वाले पीढियां जींद के इस शहीद ही शहादत को याद रखेगी।
कैप्टन अभिमन्यु, वित्त मंत्री
कैप्टन पवन की शहादत को आने वाली पीढ़ियां याद रखेगी। ऐसे जाबांज किसी जाति या वर्ग विशेष के लिए ही आदर्श नहीं होते बल्कि पूरा राष्ट्र ऐसे शहीदों पर गर्व करता है। देश भक्त पूरे देश के लिए जीते हैं। इनकी शहादत को कभी भूलाया नहीं जा सकता।
ओमप्रकाश धनखड़, कृषि मंत्री