जींद। हमारा देश डिजिटल की तरफ अग्रसर है। पिछले दिनों देश में 5जी भी लॉन्च हो गया। जींद शहर से मात्र छह किलोमीटर दूर गांव लखमीरवाला (पाथरी) आज भी 2जी की स्पीड से जूझ रहा है। गांव में नेटवर्क नहीं है, क्योंकि किसी भी कंपनी का टॉवर नहीं है। कोरोनाकाल में लॉकडाउन के दौरान जब सभी शिक्षण संस्थान बंद हो गए थे तब बच्चों का होमवर्क मोबाइल पर आने लगा था। उस समय भी नेटवर्क नहीं आने की वजह से बच्चों का होमवर्क नहीं हो पाया था। नेटवर्क को लेकर कभी छत तो कभी अन्य ऊंचाई वाली जगहों पर जाना पड़ता था। अब राशन वितरण करने के लिए यह हाल बना हुआ है। पीओएस मशीन बिना नेटवर्क के चल नहीं पाती, जिससे राशन सही तरीके से नहीं बंट पाता। आज जमाना भी डिजिटल हो गया है, लेकिन गांव में किसी भी कंपनी के नंबर पर बात नहीं हो पाती।
इसके अलावा गांव में स्वास्थ्य सेवा, परिवहन सेवा, खेल स्टेडियम, बैंक भी नहीं है। यदि कोई ग्रामीण बीमार हो जाए तो गांव से दो किलोमीटर दूर निर्जन गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जाना पड़ता है। ऐसा ही हाल परिवहन सेवा का है। बुजुर्गों को पेंशन लेने के लिए शहर जाना पड़ता है और वहां सारा दिन भूखे-प्यासे परेशान होते हैं। गांव में पशु अस्पताल है, लेकिन स्थायी चिकित्सक नहीं है। हालांकि निवर्तमान ग्राम पंचायत ने अपने अधीन क्षेत्र के तहत गांव में गलियां, नाली, चौपालों की मरम्मत सहित काफी विकास कार्य करवाए, लेकिन ग्राम पंचायत से ऊपर के कार्य पूरे नहीं हो पाए जो कि कई सालों से अधूरे पड़े हैं। गांव में 1440 वोट हैं और गांव की आबादी 3000 के करीब है।
गांव में शुरू से ही सभी कंपनियों का नेटवर्क नहीं आने की समस्या आ रही है। अब सब कुछ डिजिटल हो गया है तो पढ़ाई भी ऑनलाइन हो गई है। पढ़ाई के लिए अब नेट भी जरूरी हो गया है। कक्षा चाहे कोई भी हो, नेट के बिना काम नहीं चल रहा। बिना नेट के लॉकडाउन में भी स्कूल का काम करने में काफी दिक्कत हुई थी।
-आकाश, छात्र।
बुजुर्गों का पेंशन लेने के लिए शहर जींद जाना पड़ता है, क्योंकि बुजुर्गों ने एक ही बैंक में खाता खुलवाया हुआ है और उसकी बैंक में सभी बुजुर्गों की पेंशन आती है। पेंशन लेने के लिए बुजुर्गों को गर्मी, सर्दी और बारिश के दिनों में सारा-सारा दिन भूखा-प्यासा बैठना पड़ता है। इसलिए बैंक शाखा उनके गांव में खोली जानी चाहिए।
-बलजीत, ग्रामीण।
गांव में तीन हजार के करीब आबादी है। इनको स्वास्थ्य सेवा मुहैया करवाना सरकारी की जिम्मेदारी है, लेकिन गांव के लोगों को दवा लेने के लिए दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं गांव में उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
-जितेंद्र, ग्रामीण।
शहर से गांव आने-जाने के लिए न प्राइवेट और न रोडवेज बस सेवा है। ग्रामीणों को शहर आने के लिए गांव से दो किलोमीटर दूर निर्जन तक पैदल आना पड़ता है। उसके बाद वहां से प्राइवेट या बस का सहारा लेकर शहर जाना पड़ता है।
-फतेह सिंह, ग्रामीण।
उनके कार्याकाल के दौरान गांव में जितनी भी ग्रांट आई। उनसे अनेक विकास कार्य हुए। नाली, गली, चौपालों की मरम्मत सहित अन्य काम करवाए। लड़कियों के सरकारी स्कूल को अपग्रेशन करवाने का प्रयास किया गया। गांव में नेटवर्क की समस्या मिटाने बारे टॉवर कंपनियों से बातचीत की गई, लेकिन समाधान नहीं हो पाया।
-सुषमा राठी, निवर्तमान सरपंच, लखमीरवाला।