जींद। बाबा खाटूश्याम जाने वाली जींद डिपो की बस डेढ़ साल से बंद है। बस चलाने के लिए जरूरी रूट परमिट की जरूरत होती है। इसके लिए डिपो ने निदेशालय को पत्र लिखा हुआ है, लेकिन दोनों प्रदेश के बीच समझौता नहीं हो पाने के कारण परमिट नहीं जारी हो सका है। यात्री बार-बार डिपो प्रशासन के सामने बाबा खाटूश्याम रूट पर बस चलाने की मांग कर चुके हैं।
रोडवेज डिपो ने पिछले साल बाबा खाटूश्याम धाम के लिए रोडवेज बस सेवा शुरू की थी। यह बस सुबह खाटूश्याम के लिए रवाना होती थी। इसमें जींद से काफी यात्री बाबा खाटूश्याम के दर्शन के लिए जाते थे। रोडवेज डिपो को अच्छी आमदनी भी हो रही थी, लेकिन वर्ष 2023 की शुरुआत में रोडवेज डिपो ने खाटूश्याम जाने वाली रोडवेज को बंद कर दिया था। अब दोबारा से इस रूट पर सेवा चलाई जाए तो यात्रियों को राहत मिल सकती है।
धार्मिक स्थल के लिए बस शुरू करने की मांग
शहरवासियों ने प्रदेश के आसपास के धार्मिक स्थलों के लिए रोडवेज बस शुरू करने की मांग की है। उनकी मांग है कि पहले राजस्थान, अमृतसर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश रोडवेज की बसें जाती थीं। इससे शहर के लोगों को आसानी से बस मिल जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। शहर से बाबा खाटूश्याम के दर्शन के लिए काफी श्रद्धालु जाते थे, मगर बस के बंद होने से अब उनको परेशानी हो रही है। इसके अलावा अमृतसर और हिमाचल प्रदेश में भी कई जगह घूमने के लिए रोडवेज बसों का सहारा शहर के लोग लेते थे।
डिपो में रह गईं 77 बस
रोडवेज डिपो में मात्र 77 बस रह गई हैं। पिछले साल डिपो में 116 नई बस शामिल की गई थीं। इसके कारण डिपो और दोनों सब डिपो में बसों की संख्या 200 के पार हो गई थी। पिछले दिनों बीएस-3 की 40 बस नूंह और पलवल भेजी गई थीं। इन बसों के भेजे जाने के कारण जींद डिपो में 77 बस रह गई हैं। इसके अलावा दस बस कंडम हो गई हैं। डिपो में फिलहाल परिचालक 140 और चालक 111 हैं।
बाबा खाटूश्याम रूट पर अभी समझौता नहीं हो पाया है। इसकी वजह से इस रूट पर रोडवेज की बस नहीं चल पा रही है। फिलहाल डिपो से 40 बसें नूंह और मेवात भेज दी गई हैं। डिपो में नई बसों के आने से इस रूट पर चलाने के बारे में विचार किया जाएगा। -सुरेश, सीआई, रोडवेज डिपो, जींद।