नरवाना। आर्य समाज नरवाना में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में यज्ञ-हवन कर ईश्वर स्तुति, प्रार्थना और उपासना की गई। धर्मपाल एवं यशपाल ने भजन और गीतों के माध्यम से तप-तपस्या से आत्मशुद्धि एवं जीवन में समृद्धि का संदेश दिया।
प्रधान चंद्रकांत आर्य ने कहा कि मनुष्य का उद्देश्य हमेशा पवित्र होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सीता के अपहरण के बाद रावण के साथ युद्ध में जटायु घायल हुए, वहीं महाभारत में योगीराज श्रीकृष्ण ने युद्ध रोकने के लिए अनेक प्रयास किए, लेकिन दोनों ही परिस्थितियों में उद्देश्य पवित्र था। सफलता मिले या न मिले, मनुष्य को पर्यावरण, प्रकृति, समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए पवित्र उद्देश्य से सार्थक प्रयास करते रहना चाहिए।
डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और स्वार्थ की प्रवृत्ति ने सामाजिक लोकाचार को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने समाज को व्यवस्थित और नैतिक बनाने पर जोर दिया।
जयपाल सिंह आर्य ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य पर देव, पितृ, ऋषि, भूत और लोक ऋण होता है। उन्होंने लोगों से जीवनकाल में पेड़ लगाने और उनका संरक्षण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नदियों, तालाबों और जल स्रोतों का प्रदूषण चिंता का विषय है।
मिथिलेश शास्त्री ने कहा कि वैदिक विद्या, ज्ञान-विज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय से प्रकृति, प्राणी जगत और संसाधनों का संरक्षण कर आगामी पीढ़ियों का जीवन सुरक्षित किया जा सकता है। इस अवसर पर वेदपाल, किताब सिंह, संजीव, रामकुमार कर्ण सहित अन्य आर्यजन मौजूद रहे।