उचाना। कर्म कभी किसी में मतभेद नहीं करते, वे अपना फल जरूर देते हैं। मन की शांति ही स्वर्ग है। स्वर्ग-नरक मरने के बाद ही मिलते हों, ऐसा नहीं है। जीते जी भी इन्हें भोगा व देखा जा सकता है। नरक की सीढ़ी यदि घर से गुजरती है तो स्वर्ग की सीढ़ी भी वहीं से गुजरेंगी। सीढ़ी चढ़ने-उतरने दोनों काम आती है। जिस सीढ़ी से उतर कर नरक जा सकते हैं, उसी पर चढ़कर स्वर्ग भी जा सकते हैं। यह बात महाराजा अग्रसेन मंदिर के पुजारी अशोक शर्मा ने शहर में आयोजित भजन-कीर्तन में कही। उन्होंने कहा कि कर्म हमेशा देख कर करें। भगवान से न डरो तो चलेगा पर कर्मों से जरूर डरो। क्योंकि किए कर्मों का भुगतान तो भगवान को भी करना पड़ता है। कर्म कभी किसी में मतभेद नहीं करते, वे तो अपना फल दिखाते ही है।