जब भी कारगिल युद्ध का जिक्र आता है बरसोला गांव के सूबेदार मेजर जयपाल सिंह का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। वे बताते हैं उन्होंने अपने परिवार से कारगिल युद्ध में जाने की बात छिपा ली थी। एनसीसी के किसी हवलदार ने पत्नी को यह बात बताई। इसके बाद घर से चिट्ठी आई। इसमें भाई ने लिखा था- अगर लड़ाई में गोली खानी पड़े तो सीने में खाना, पीठ पर नहीं।
सूबेदार मेजर जयपाल बताते हैं कारगिल युद्ध के समय उन्होंने 17 जाट रेजिमेंट में मोबाइल फायर सिस्टम की अगुवाई की थी। वे बताते हैं उस समय तीन दिन में ही चिट्ठी घर पहुंच जाती थी। उन्होंने परिजनों से इसलिए युद्ध में जाने की बात छिपाई थी ताकि वे चिंता न करें। परिवार को जब मोर्चे पर डटने की जानकारी मिली तो भाई ने चिट्ठी भेजकर हौसला अफजाई की थी।