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Jind News: डूमरखा कलां की कमलेश ने छत और आंगन को बनाया हरियाली का स्वर्ग

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फोटो 9 नरवाना। पौधों में पानी देते हुए कमलेश। संवाद।
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नरवाना। जहां शहरों में हरियाली कम हो रही है, वहीं गांव डूमरखा कलां की कमलेश ने अपने छोटे से प्रयास से प्रकृति को जीवंत किया है। कमलेश ने अपने घर के अंदर ही नहीं बल्कि पीछे की खाली जगह और छत के एक हिस्से को सुंदर बगिया में बदल दिया है। यह पहल दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
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कमलेश की बगिया में मिर्च, बैंगन, भिंडी, लौकी, तोरई, धनिया और पुदीना जैसी कई मौसमी सब्जियां उगती हैं। इसके साथ ही अमरूद, नींबू जैसे फलों के पौधे और गुलाब, गुड़हल, गेंदा जैसे रंग-बिरंगे फूल भी लगे हैं। घर की सजावट के लिए अनेक प्रकार के सजावटी पौधे भी यहां मौजूद हैं।
छत पर रखे गमलों में भी आकर्षक पौधे लहलहाते हैं जो पूरे घर को प्राकृतिक सुंदरता देते हैं। कमलेश बताती हैं कि वह हर दिन कुछ समय पौधों के बीच बिताती हैं। कमलेश ने कहा, घर पर उगाई सब्जियों से बाजार की कीटनाशक वाली दवाइयों वाली सब्जियों से छुटकारा मिल जाता है। वह हर वर्ष पालक, मिर्च, बैंगन, घीया और तोरई की बेल लगाती हैं। इन सब्जियों को वह अपने आस-पड़ोस के लोगों के साथ भी मिल-बांटकर खाती हैं। इससे आपसी समन्वय और भाईचारा बढ़ता है।
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मानसिक शांति और पर्यावरण संरक्षण
कमलेश को पौधों की देखभाल करते हुए मानसिक शांति, सुकून और नई ऊर्जा मिलती है। उनका कहना है। हरियाली के बीच बिताए गए कुछ पल दिनभर की थकान और तनाव को दूर कर देते हैं। उनका मानना है कि हर व्यक्ति थोड़ी सी जगह में पौधे लगाए तो पर्यावरण संरक्षण होगा। इससे घर की जरूरत की ताजी सब्जियां भी आसानी से मिलेंगी।
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