नरवाना। पराली जलाने की घटनाओं के कारण कृषि विभाग की निगरानी में आए कालवन गांव ने अब रेड जोन से बाहर निकलने की तैयारी शुरू कर दी है। गांव की सरपंच कविता और उनके प्रतिनिधि बहादुर व कुलदीप ने किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक करने का अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
गांव में मुनादी करवाकर किसानों को पराली प्रबंधन के फायदे और पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जाएगा। अभियान का उद्देश्य गांव के प्रत्येक किसान तक पहुंचना है। किसानों को समझाया जाएगा कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होने के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है।
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मशीन समय पर मिले तो किसान नहीं जलाएंगे पराली
गांव में पराली प्रबंधन के सामने मशीनों की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरपंच कविता के अनुसार किसानों की शिकायत है कि पराली की गांठें बनाने वाली बेलर मशीन समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती। धान की कटाई के बाद गेहूं की बिजाई के लिए खेत जल्दी खाली करना जरूरी होता है। ऐसे में मशीन उपलब्ध न होने पर कुछ किसान पराली जलाने का रास्ता अपना लेते हैं। कृषि विभाग से मांग की है कि फसल कटाई के समय गांव में बेलर और अन्य पराली प्रबंधन मशीनें पर्याप्त संख्या में उपलब्ध कराई जाएं, ताकि किसानों को मशीन के लिए इंतजार न करना पड़े।
रेड जोन से बाहर निकलने के लिए यह उठाए जाएंगे कदम
कालवन को रेड जोन से बाहर लाने के लिए सबसे जरूरी है कि पराली जलाने की घटनाएं पूरी तरह रोकने के साथ खेतों में वैकल्पिक प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए किसानों को समय पर बेलर, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और अन्य मशीनें उपलब्ध कराना, कस्टम हायरिंग सेंटरों के माध्यम से मशीनों की व्यवस्था करवाई जाएगी।
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गांव को रेड जोन से बाहर निकालने के लिए अपने स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। सरकार और कृषि विभाग समय पर बेलर समेत अन्य मशीनें उपलब्ध करवाएं, ताकि कोई किसान मजबूरी में पराली न जलाए। इसके लिए वह गांव में टीम भी बनाएंगे, खुद इसकी निगरानी करेंगे। प्रशासन से हर संभव सहायता समय से ली जाएगी।
कविता, सरपंच कालवन