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जुलाना की प्यास बुझाने की क्लस्टर योजना को झटका

Tue, 09 May 2017 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो जींद
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गांव रधाना में कुए से पानी भरती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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एक साल पहले निडाना गांव में पानी के लिए हुई पांच युवाओं मौत के बाद जुलाना क्षेत्र के की प्यास बुझाने के लिए बनी क्लस्टर योजना को फिर करारा झटका लगा है। पिछले महीने हुई सेनेटरी बोर्ड की मीटिंग में योजना को स्वीकृत कर दिया गया, लेकिन इसके लिए बजट का प्रावधान नहीं किया गया है। अब प्रशासन परियोजना के लिए केंद्र से धन जुटाने के लिए नाबार्ड की ओर देख रहा है। इससे जुलाना क्षेत्र के 20 गांवों को पेयजल मुहैया कराने की योजना है।      
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दरअसल जुलाना क्षेत्र के अधिकतर गांवों में या तो जलघर है, या फिर वह पास के गांव के जलघर से जुड़ा है। इसके बावजूद अधिकतर गांवों में पेयजल की भयंकर किल्लत है। फिलहाल गांवों की पेयजल व्यवस्था 24 दिन के बाद नहरी पानी आने के अनुसार बनाई गई हैं, लेकिन नहरों में 32 से 40 दिन के बाद पानी आ रहा है। ऐसे में जन स्वास्थ्य विभाग लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रहा है। अब इस योजना से जलघरों के लिए नहरों से कच्चा पानी उठाने की स्कीम बनाई गई है।       

इन गांवों को होगा लाभ      
 4533 आबादी वाले देवरड़ गांव में जलघर माइनर से पांच किलोमीटर दूर है। यहां 350 मिली मीटर डाया की पाइप से पानी जलघर तक पहुंचता है। जनस्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस पाइप लाइन में गाद जमने के बाद पानी नहीं पहुंच पा रहा है।       
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क्लसटर एक      
देश खेड़ा ग्राम समूह :      
इस परियोजना में देश खेड़ा और राजगढ़ गांव शामिल हैं। दोनों गांवों के लिए पेयजल फिलहाल कमाचखेड़ा माइनर से मिल रहा है, लेकिन माइनर में पानी की मात्रा कम होने के कारण जलघर में कच्चे पानी की समस्या बनी रहती है।       
क्लटर दो      
- बुवाना और बूराडहर, बराड़ खेड़ा, बहबलपुर, बीबीपुर और इगराह गावों में आसपास की माइनरों से पेयजल मुहैया करवाया जा रहा है इन माइनरों में पानी कम होने के कारण लोगों को दिक्कत आ रही है। नई योजना के तहत सुंदर ब्रांच से टैंक बनाकर पानी जलघरों को भेजा जाएगा।       
क्लस्टर तीन      
इस क्लसटर में ढिगाना, निडाना, शामलो खुर्द, अनूपगढ़, निडानी, पडाना, रधाना और अशरफगढ़ गांव शामिल हैं। इन गांवों को भी आसपास की माइनरों से ही पानी मुहैया करवा जा रहा है, लेकिन माइनरों में पानी कम होने के कारण अब दिक्कत आ रही है। ऐसे में इस क्लस्टर में भी सुंदर ब्रांच नहर से पानी टैंक बनाकर जलघरों तक लाया जाएगा।       
 
क्लस्टर परियोजना की डीपीआर बनाई गई थी। इसमें भी गांवों को पेयजल मुहैया करवाने पर करीब 28 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। यह राशि अधिक है। ऐसे में सेनेटरी बोर्ड ने इसकी राशि को मंजूर नहीं किया है। अब बजट के लिए योजना को नाबार्ड की योजना में रखा जाएगा।  -बीपी शर्मा, एक्सईएन जनस्वास्थ्य विभाग      
   
निडाना में पानी की किल्लत, डीसी ऑफिस पर मटके फोड़ कर किया प्रदर्शन      
जुलाना क्षेत्र के ही निडाना गांव के लोगों ने पेयजल किल्लत से परेशान होकर डीसी ऑफिस पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने यहां मटके फोड़ कर रोष जताया। यहां प्रदर्शन करने वालों में अधिकतर लोग उसी बस्ती के थे, जहां पानी की किल्लत के कारण पिछले साल पांच युवाओं की जान गई थी। इन लोगों ने कहा गांव में जलघर होने के बावजूद नियमित सप्लाई नहीं आ रही है। यहां पीने के पानी के भी लाले पड़े हैं। महिलाओं ने कहा कि जब कभी सप्लाई आती है, अवैध कनेक्शनों के कारण उनके घरों तक पानी पहुंच ही नहीं पाता।
       ग्रामीणों ने कहा कि लाखों रुपये खर्च कर सरकार ने गांव के जलघर की मरम्मत तो करवा दी, लेकिन नहरी पानी आने के बावजूद सप्लाई नहीं किया जा रहा है। इससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है।      
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