पौली गांव के ग्रामीण गांव में जलघर होते हुए भी वर्षों से पानी की किल्लत झेल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलघर बनने के बाद एक दिन भी पीने लायक पानी नहीं मिला है। पानी पहुंचाने की गुहार छोटे अधिकारी से लेकर बड़े अधिकारी और मंत्री तक भी लगा चुके हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला है।
ग्रामीणों दलबीर, प्रदीप, महेश, ज्योति और वंदना के अनुसार गांव में जलघर तो सरकार ने बना दिया है, लेकिन आज तक गांव में पीने का पानी नहीं पहुंचा है। गांव में भूमिगत पानी खारा है जो किसी भी लिहाज से पीने के लायक नहीं हैं। महिलाओं को पानी बाहर खेतों से लाना पड़ रहा है। पीने के पानी की किल्लत को लेकर अधिकारियों व राजनेताओं से कई बार गुहार लगाई है लेकिन समाधान आज तक नहीं हुआ है। गांव में लगाए गए सबमर्सिबल का पानी इतना खारा है कि इसे पीना तो दूर, नहाना सभी संभव नहीं है। इसके कारण लोगों को करीब दो किलोमीटर दूर बाहर खेतों से पानी लाना पड़ रहा है।
जलघर बना पशुओं का अड्डा
गांव पौली के जलघर चहारदीवारी नहीं होने पर जलघर में पशु घुस जाते हैं। इससे जलघर में गंदगी फैलती है। जलघर में चारों तरफ गंदगी है और टैंक सूखे हैं, जिनमें बच्चे क्रिकेट खेलते हैं। एक वर्ष पहले काफी गुहार लगाने के बाद जलघर के टैंको में नहर पर सबमर्सिबल लगाकर पानी सप्लाई होना था। आज तक पाइप लाइन का काम भी अधर में ही लटका है।
अधिकारियों की ढिलाई से लटकी परियोजना
जलघर को सबमर्सिबल से जोड़ने के लिए तीन महीने पहले टेडर दिए जा चुके हैं। अधिकारियों के ढीले रवैये के कारण ठेकेदार ने अब तक काम शुरू नहीं किया है। इससे ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में कई बार अधिकारियों से लेकर मंत्रियों तक मिला जा चुका है। लेकिन कोई भी समाधान नहीं हुआ। -सुंदर सिंह, सरपंच पौली।
करवाएंगे समाधान
गांव में पानी की समस्या है। इसके लिए वैकल्पिक समाधान किए जा रहे हैं। जल्द ही गांव में सबमर्सिबल पंप लगवाकर लोगों को पेयजल मुहैया करवाया जाएगा। इसके लिए व्यवस्था की जा रही है। -बीपी शर्मा, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग