पहलवान बजरंग पूनिया ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान मौत का ग्रास बने 19 किसानों की खटकड़ टोल के पास प्रतिमा लगाई जाएगी। ताकि भविष्य में इन किसानों के बारे में युवा पीढ़ी को पता चल सकें। जो तीनों कृषि के काले कानून केंद्र सरकार ने बनाए थे उन काले कानूनों को केंद्र सरकार को किसान आंदोलन के चलते रद्द करना पड़ा। 12 दिसंबर को खटकड़ टोल पर दूसरा किसान आंदोलन विजय दिवस मनाया जाएगा।
बजरंग पूनिया मंगलवार को खटकड़ टोल से किसान जन चेतना यात्रा में पहुंचे। यह यात्रा खटकड़, बरसोला, दरियावाला, संगतपुरा, जलालपुरा, जुलानी, झांझ खुर्द, झांझ कलां गावों में यात्रा पहुंची और यह यात्रा जिले के सभी गांवों में जाएगी। उन्होंने कहा कि 12 दिसंबर को होने वाला कार्यक्रम गैर राजनीति होगा। किसानों को फसलों का उचित भाव मिलना चाहिए।
आज खेती किसान के लिए घाटे का सौदा बन रही है। युवाओं का खेती से मोह भंग होने लगा है। जो-जो मांगे केंद्र सरकार ने आंदोलन स्थगित होने के दौरान मानी थी उन मांगों को लागू किया जाए। एमएसपी पर कानून बनने के साथ स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया जाए। डॉ. रजनीश ने कहा कि किसानों का ये आंदोलन देश की आजादी के बाद सबसे बड़ा आंदोलन था।
पूरे देश के किसानों ने अपने हक के लिए संघर्ष किया। इस आंदोलन को सदियों तक याद रखा जाएगा। इस मौके पर अनीता सुदकैन, पूनम कंडेला, संतरो, रामरती, राजबाला खटकड़, कमला जुलानी, कैप्टन वेद प्रकाश, कैप्टन भूपेंद्र जागलान, पवन फौजी, संदीप डूमरखां मौजूद रहे।