हरियाणा के जींद जिले के एक गांव की दुष्कर्म पीड़िता 17 वर्षीया लड़की ने बुधवार की रात नागरिक अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। लड़की का आपरेशन किया गया था। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। बच्चे को अस्पताल की नर्सरी में दाखिल कराया गया है। लड़की के गर्भवती होने की जानकारी होने के बाद परिजनों ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया था और डेढ़ महीने वे उसे महिला एवं बाल विकास विभाग के पास छोड़ गए थे।
लड़की को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जिला महिला एवं बाल संरक्षण विभाग को सौंपा जाएगा। यहां से बच्ची को स्पेशलाइज्ड एडप्शन एजेंसी को सौंप दिया जाएगा। फिलहाल लड़की और बच्चा दोनों ही नागरिक अस्पताल में दाखिल हैं। जिले के एक गांव की रहने वाली 17 वर्षीय लड़की के साथ करीब नौ माह पहले दुष्कर्म हुआ था। तीन माह पहले तबीयत बिगड़ने पर परिजन किशोरी को पीजीआई रोहतक ले गए थे।
वहां पता चला था कि लड़की 6-7 महीने की गर्भवती है। वहां से यह मामला जिला महिला एवं बाल संरक्षण विभाग के संज्ञान में आया था। विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पीड़िता के बयान दर्ज किए थे। तबीयत में सुधार होने पर परिजन लड़की को अपने घर ले गए लेकिन डेढ़ महीने पहले परिजन लड़की को महिला एवं बाल विकास विभाग के पास छोड़ गए। उस समय लड़की आठ महीने की गर्भवती थी।
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किशोरी के परिजन चाहते थे कि लड़की बच्चे को घर की बजाय दूसरी जगह जन्म दे। उसके बाद लड़की को जींद स्थित आश्रम में छोड़ने की अनुमति दी गई। तब से वह यहां आश्रम में रह रही थी। बुधवार रात को प्रसव पीड़ा होने पर लड़की को नागरिक अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां सिजेरियन से लड़की ने बच्चे को जन्म दिया। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। लड़की को अभी अस्पताल में दाखिल रखा गया है, वहीं बच्चे को भी नर्सरी में रखा गया है।
करीब डेढ़ माह पहले लड़की के परिजन उसे विभाग के पास छोड़कर गए थे। लड़की ने बुधवार रात को बच्चे को जन्म दिया है। उसे परिजनों ने सरेंडर करने की बात कही है। सरेंडर होने पर लड़की को स्पेशलाइज्ड एडप्शन एजेंसी को सौंपा जाएगा।
-नरेंद्र अत्री, प्रधान, सीडब्ल्यूसी, जींद।