22 दिन से चल रहे जाट आरक्षण आंदोलन के धरने पर रविवार को वर्ष 2016 में आंदोलन में जान गंवाने वाले लोगों की याद में बलिदान दिवस मनाया गया। इस दौरान करीब 50 हजार लोगों धरने पर शिरकत की। धरने पर जुटी भीड़ के कारण टेंडरी मोड़ से लेकर ईक्कस गांव तक जींद-हांसी रोड जाम रहा। भीड़ का आलम यह रहा कि करीब ढाई एकड़ में लगाया गया टेंट छोटा पड़ गया। इसके बाद अलग से खड़े गेहूं की फसल पर तिरपाल बिछाकर महिलाओं के लिए बैठने की जगह बनाई गई।
वहीं सुबह करीब 11 बजे रानी तालाब चौक पर बाइक पर सवार सैकड़ों युवकों ने शहर में प्रदर्शन करने का प्रयास किया, लेकिन यहां पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। इसके बाद एसएसपी शशांक आनंद और शहर के कुछ लोगों ने युवकों को समझा बुझाकर वापस भेज दिया। इस दौरान की करीब आधा घंटे तक रानी तालाब से पुरानी अनाज मंडी वाला रोड बंद रहा। वहीं धरना स्थल पर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के लिए फैसलों का लोगों ने समर्थन किया।
बलिदान दिवस को लेकर जुटने वाली भीड़ और इससे निपटने के लिए प्रशासन तैयार रहा। इसके चलते हर चौक-चौराहे पर भारी संख्या में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। धरने पर जाने वाले अधिकतर वाहनों को शहर के बाहर से ही भेजा गया। गोहाना रोड के वाहनों को रोहतक-भिवानी रोड बाईपास, सफीदों रोड के वाहनों को गोहाना रोड बाईपास व कैथल-नरवाना रोड से आने वाले वाहनों को सीधे हांसी रोड से धरना स्थल तक भेजा गया। वहीं हर स्थिति पर नजर रखने के लिए डीसी विनय सिंह और एसएसपी शशांक आनंद भी तमाम अधिकारियों के साथ टेंडरी मोड़ पर रहे। शाम पांच बजे तक सभी वाहन शहर से निकलने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
सुप्रीम कोर्ट की वकील ने की शांति की अपील
इस दौरान सुंदरपुर गांव निवासी और सुप्रीम कोर्ट की वकील सविता ढांडा ने लोगों से शांति की अपील की। उन्होंने कहा कि 14 बिरादरी के लोगों का समर्थन अब जाट आरक्षण आंदोलन को मिल रहा है। ऐसे में लोगों को शांति से आंदोलन करना चाहिए।
रोडवेज रूट को बदला
जाट आंदोलन के चलते रोडवेज ने हिसार और दिल्ली के रूटों में कुछ बदलाव किया। अन्य रूटों पर बसों का परिचालन अन्य दिनों की तरह ही रहा। जींद-दिल्ली के बीच चलने वाली सभी बसों को पानीपत के रास्ते भेजा गया। वहीं हिसार जाने वाली बसों को हांसी तक चलाया गया, लेकिन दोपहर के समय हांसी रोड बंद होने के कारण इन बसों को बरवाला के रास्ते चलाया गया। दिल्ली रूट पर रोहतक तक की सेवाएं सामान्य रही।
कैप्टन ने साधा अभिमन्यु पर निशाना
केस वापसी पर सरकारी की ओर से फंसे पेंच पर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य कैप्टन रणधीर सिंह चहल ने कहा कि वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु एक कोठी की बात करते हैं। जाट समाज ऐसी-ऐसी 10 कोठी बनाकर दे सकता है, लेकिन जिन घरों के युवकों की जान आंदोलन में चली गई हैं, उन्हें कैसे वापस करेंगे।
हुड्डा बोले, मांग पूरी होने तक नहीं उठेंगे धरने
समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहताश हुड्डा ने कहा कि सरकार षडयंत्र करना चाहती है। यह लड़ाई अब न्याय के साथ-साथ जाटों के वजूद की भी है। मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दिए जा रहे मुआवजे को जाट नहीं लेंगे। इसका विरोध करते हैं। उन्होंने मांग की कि आंदोलन में मारे गए लोगों के परिजनों को पक्की नौकरी दी जाए। घायलों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा और गंभीर घायलों को सरकारी पक्की नौकरी दी जाए।
कर्ण सिंह के परिवार को आर्थिक मदद
पिछले सप्ताह हार्ट अटैक से धरने पर ही जान गंवाने वाले पाजू खुर्द गांव निवासी कर्ण सिंह के परिवार को एक लाख 51 हजार रुपये दिए। वहीं कर्ण सिंह के नाम का प्रशस्ति पत्र भी उनके बेटे विनोद को दिया।
कम पड़ी जमीन
धरना स्थल पर भारी भीड़ जुटाने के लिए आरक्षण संघर्ष समिति के लोगों ने काफी तैयारी की थी, लेकिन भीड़ समिति की उम्मीदों से भी कहीं ज्यादा रही। समिति के लोग एक लाख से अधिक लोगों के पहुंचने का दावा कर रहे हैं, लेकिन सरकारी एजेंसियों की रिपोर्ट में लोगों की संख्या 40 हजार से 60 हजार के बीच बता रही हैं। वहीं धरने पर पहुंचे लोगों के अनुसार धरने पर 60 से 80 हजार के बीच लोग पहुंचे हैं। भीड़ का आलम यह रहा कि करीब ढाई एकड़ में लगाया गया टेंट छोटा पड़ गया। इसके बाद अलग से खड़े गेहूं की फसल पर तिरपाल बिछाकर महिलाओं के लिए बैठने की जगह बनाई गई।
धरने पर सुनाए समिति के फैसले, लोगों ने हाथ उठाकर किया समर्थन
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहताश हुड्डा ने दोपहर बाद करीब दो बजे धरने पर समिति के फैसले सुनाए। इस दौरान लोगों ने हर फैसले पर हाथ उठाकर इसका समर्थन किया।