लिंगानुपात सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अनूठी पहल शुरू की है। स्वास्थ्य विभाग की टीम विवाह समारोह में फेरों के समय जाकर दूल्हा-दुल्हन को कन्या भ्रूण हत्या नहीं करने के लिए आठवां फेरा दिलवाएगी विवाह समारोह हो तो वर या वधू पक्ष द्वारा स्वास्थ्य विभाग की टीम को समारोह में बुला कन्या भ्रूण हत्या न करने की शपथ दिलवाई जाती है। ऐसा ही हुआ है गांव अहिरका में।
जहां गांव के ही सुभाष भोला की शादी गांव लिजवाना कलां निवासी पिंकी के साथ हुई। विवाह समारोह के दौरान आए रिश्तेदारों, सगे संबंधियों सहित गांव के अन्य लोगों ने बेटी बचाओ मुहिम की आहुति डाली। इसके साथ ही विवाह समारोह के दौरान मौजूद रहे अविवाहित लड़के और लड़कियों ने भी कन्या भ्रूण हत्या न करने और इसके लिए खुद की शादी में आठवां फेरा लेने का संकल्प लिया। गांव अहिरका में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यातिथि के तौर पर सामान्य अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश भोला ने शिरकत की और विवाह समारोह के दौरान डॉ. भोला ने नवविवाहित जोड़े सहित वहां उपस्थित सभी लोगों को शपथ दिलाई कि कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम के लिए परिवार, समाज व रिश्तेदारों को जागृत करने की जरूरत है। हमें शपथ लेनी चाहिए कि कन्या भ्रूण हत्या न करवाएंगे और न ही होने देंगे।
उन्होंने कहा कि गिरता लिंगानुपात समाज के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है और इसे रोकना बेहद जरूरी है। फेरों के दौरान आठवां फेरा व आठवां वचन लेकर दूल्हा, दुल्हन ने बेटी बचाओ अभियान में जो आहुति डाली है, उससे युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग भी अभियान को लेकर गंभीर है और विभाग द्वारा इसके लिए भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई कन्या भ्रूण हत्या करवाए जाने की सूचना देता है, तो विभाग द्वारा उसे एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा और साथ ही उसका नाम भी गुप्त रखा जाएगा। उन्होंने विवाह समारोह में मौजूद लोगों से आह्वान किया कि वे भी अपने समारोह में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करें और कन्या भ्रूण हत्या को लेकर अभियान चलाएं।
मेरी बेटी, मेरा वैभव मुहिम के तहत महात्मा गांधी शिक्षा एवं समाज विकास संगठन के अध्यक्ष राजकुमार भोला ने कहा की कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अब लोग जागरूक होने लगे हैं।
आठवें फेरे पर ली कन्या भ्रूण हत्या न करने की शपथ
नवविवाहित जोड़े सुभाष भोला व पिंकी ने कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ आठवां फेरा व आठवां वचन लेकर अपनी फेरों की रस्म को पूरा किया। स्नातक में पढ़ रहे सुभाष व पिंकी ने कहा की जब तक मां स्वयं अपनी बेटी को बचाने के लिए आगे नहीं आएगी, तब तक कन्या भ्रूण हत्या को खत्म नहीं किया जा सकता है। बारातियों ने भी कन्या भ्रूण हत्या नहीं करने की शपथ ली।