गांवों के विकास के लिए खरीदी जाने वाली सामग्री के लिए निर्धारित फर्म की व्यवस्था हाटने और डीसी विनय सिंह पर अभद्रता का आरोप लगाते हुए जिला भर के सैकड़ों सरपंचों और पंचों ने प्रदर्शन किया। इन लोगों ने कहा कि यदि 10 अगस्त तक फर्म व्यवस्था समाप्त नहीं होती, तो प्रदर्शन में शामिल सभी सरपंच सामूहिक रूप से त्यागपत्र दे देंगे। इस दौरान जिला परिषद की चेयरमैन पदमा सिंगला, उप प्रधान उमेद सिंह और केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के साथी और वरिष्ठ भाजपा नेता विनोद सिंगला भी शामिल रहे।
सरपंचों का आरोप है कि फर्म से सामान खरीदने की शर्त हटवाने की मांग को लेकर ये लोग बृहस्पतिवार को डीसी विनय सिंह से मिले थे। आरोप है कि इस दौरान डीसी ने उनके साथ बदतमीजी की तथा कमीशनखोर कहा। इसको लेकर कई गांवों के सरपंच शुक्रवार सुबह डीआरडीए में एकत्रित हुए और डीसी के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। इन लोगों ने कहा कि फिलहाल निर्धारित चार फर्म हैं, जिनसे सामान खरीदा जाना है। सरपंचों ने आरोप लगाया कि इन फार्मों से सामान पूरा नहीं होता। इतना ही नहीं यदि नरवाना के किसी गांव में दो क्विंटल सरिया या 10 बैग सीमेंट जाना है, तो सामान के बराबर ही इसका किराया लग जाता है। ऐसे में यह पंचायतों को बहुत महंगा पड़ रहा है।
ऐसे समझें फर्म व्यवस्था को
जिला प्रशासन ने गांवों के विकास कार्यों के लिए खरीदे जाने वाले सामान के लिए फर्म निर्धारित की हैं। इतना ही नहीं इन फर्मों से खरीदे जाने वाले सामान की कीमत भी बाजार मूल्य से कम निर्धारित की गई है। सरपंचों के समर्थन में आए जिला परिषद के उपप्रधान उमेद सिंह ने बताया कि मार्केट में जो सीमेंट का बैग 350 रुपये का मिल रहा है, जिला प्रशासन द्वारा उसका रेट फर्म से 235-240 रुपये निर्धारित किया गया है। ऐसे में फर्म उन्हें पर्याप्त माल उपलब्ध नहीं कराती।
नेतागिरी चमकाने के आरोप
जब सरपंच प्रदर्शन कर रहे थे तो इसी दौरान चक्की मोड़ के पास जिला परिषद चेयरपर्सन पद्मा सिंगला के पति और भाजपा नेता विनोद सिंगला भी इसके साथ आ गए। लघु सचिवालय पहुंचकर सिंगला ने कहा कि ज्ञापन के लिए वे अभी डीसी को बुला देते हैं। इस पर सरपंचों ने उनका विरोध करना शुरू दिया और कहा कि वे डीसी की ही शिकायत करने आए हैं, ऐसे में उन्हें डीसी को ज्ञापन नहीं देना। कुछ लोगों ने सिंगला पर नेतागिरी चमकाने के भी आरोप लगाए।
ज्ञापन देने पर हुआ ड्रामा
सरपंच प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पर ज्ञापन देने पहुंच गए। यहां एसडीएम सतबीर कुंडू को ज्ञापन लेने के लिए बुलाया गया, लेकिन इस दौरान सरपंचों ने अपना भाषण जारी रखने की बात कह कर ज्ञापन देने से मना कर दिया। इसके बाद नायब तहसीलदार आनंद सिंह को बुलाया। इस बार सरपंचों के पास ज्ञापन ही नहीं मिला। ऐसे में वे वापस लौट गए। इसके बाद ज्ञापन मिलने के बाद दोबारा नायब तहसीलदार आनंद सिंह को बुलाया गया।
मनमानी कर रहा है प्रशासन
प्रशासन मनमानी चला रहे हैं और यह व्यवस्था हरियाणा भर में कहीं नहीं है। ऐसे में पंचायतों के विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। फर्म व्यवस्था सही नहीं है। इसे हटाकर पंचायतों को खुले बाजार से सामान खरीदने की अनुमति दी जाए।
-उमेद सिंह, उप प्रधान जिला परिषद।
डीसी ने किया अपमानित
सभी सरपंच अपनी मांग लेकर डीसी विनय सिंह से मिलने गए थे, लेकिन बृहस्पतिवार को उन्हें डीसी ऑफिस में डीसी ने अपमानित किया। इस पर गहरा रोष है। सरपंच, गांव के चुने हुए प्रतिनिधि हैं। यह पूरे गांव का अपमान है।
रवि, सरपंच बराड़ खेड़ा
जिला में विकास कार्यों में प्रयोग होने वाली सामग्री अच्छी गुणवत्ता की मिले। इसके लिए मैटेरियल सप्लाई करने वाली फर्मों से कोटेशन मांगी जाती हैं। जिस फर्म की रेट कोटेशन सबसे कम दर की होती है उसे मैटेरियल सप्लाई करने के लिए पाबंद कर दिया जाता है। इस काम के लिए फर्मों से सिक्योरिटी भी जमा कराई जाती है ताकि फर्म के समय पर सही गुणवत्ता की सामग्री सप्लाई नहीं किए जाने की सूरत में उसकी सिक्योरिटी को जब्त किया जा सके। किसी भी जेई, एसडीओ या अन्य अधिकारी से मैटेरियल समय पर उपलब्ध नहीं होने की शिकायत नहीं मिली है और न ही गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत मिली है।
-विनय सिंह, डीसी