गांव कैरखेड़ी के लोग पिछले 10 दिन से संदिग्ध बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। रविवार रात को भी गांव के दो परिवार के लोगों को अचानक उल्टी, दस्त और सिर चकराने की समस्या हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने दोनों ही परिवारों के लोगों को निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। जहां पर एक महिला की अस्पताल में लाते समय मौत हो गई। इससे पहले भी दर्जन भर के करीब लोग बीमारी की चपेट में चुके हैं। गांव में फैली बीमारी को लेकर सोमवार को गांव कैरखेड़ी के सरपंच राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में ग्रामीण सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया से मिले। ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में संदिग्ध बीमारी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। जो इसकी चपेट में आते हैं, उन्हें अचानक उल्टी-दस्त और सिर में चक्कर आने की दिक्कत होती है। इसकी चपेट में आया व्यक्ति चारपाई से उठ नहीं पा रहा है।
रविवार रात को गांव के टेकराम और राजेंद्र के परिवार के लगभग नौ सदस्यों को अचानक ही उल्टी, दस्त व सिर में चक्कर आने की समस्या हो गई। ग्रामीणों को जैसे ही दोनों परिवारों का बीमार होने का पता चला तो उनको नजदीक के निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। इस दौरान उपचार के लिए अस्पताल ले जाते समय ओमप्रकाश की पत्नी चंद्रो की रास्ते में मौत हो गई। उसके बाद परिवार के लोग उसको वापस ही गांव ले गए। जहां पर शव का पोस्टमार्टम करवाए बिना ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। जबकि बीमारी की चपेट में आए टेकराम, उसके बेटे शमशेर, पौत्र कमल को निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। जबकि दूसरे परिवार के राजेंद्र, उसके बेटे अजय, अंजली व परिवार के दो महिलाओं को निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया।
कई लोग चल रहे बीमार
सिविल सर्जन से मिलने पहुंचे सरपंच राजेंद्र, पंच रामभज, सतीश कुमार, सतबीर सिंह ने बताया कि बीमारी का प्रकोप पिछले लगभग 10 दिन से चल रहा है। गांव के कई लोग बीमारी की चपेट में आ चुके हैं और अधिकतर लोगों का उपचार हिसार के निजी अस्पतालों में चल रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले सप्ताह भी गांव के बलवंत का छह वर्षीय बेटा अंशुल भी ऐसी ही बीमारी की चपेट में आ गया था। उसका हिसार के निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। जहां पर शुक्रवार को उसकी मौत हो गई थी, लेकिन अब बीमारी का ज्यादा प्रकोप बढ़ गया है और मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
गंदे पेयजल पर संदेह
गांव के सरपंच राजेंद्र सिंह ने बताया कि कैरखेड़ी गांव में गांव अहिरका के जलघर से पानी की सप्लाई होती है। सुबह और शाम को जब पानी की सप्लाई आती है तो शुरुआत में पीले रंग का पानी आता है। कुछ समय के बाद पानी साफ दिखाई देता है। ग्रामीणों को संदेह है कि गांव के सप्लाई और जमीनी पानी की दिक्कत है। इसके चलते लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इसलिए सिविल सर्जन से मिलकर मरीजों के खून के नमूने लेने और पानी की सैंपल लेने के लिए कहा है।
डायरिया के दिखाई दे रहे लक्षण
सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया ने बताया कि कैरखेड़ी के सरपंच ने मिलकर उनको बीमारी फैलने के बारे में अवगत करवाया है। मरीजों को जैसे लक्षण बताए जा रहे है वह प्राथमिक दृष्टि से डायरिया के लक्षण है। मरीजों की जांच के लिए टीम को भेजा जाएगा और सैंपल लिए जाएंगे। रिपोर्ट मिलने के बाद ही बीमारी और उसके कारणों का पता चल पाएगा।