फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिजली निगम के 29 करोड़ पर सरकारी विभागों की कुंडली

Mon, 06 Mar 2017 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
विज्ञापन
बिजली निगम सर्कल ऑफिस का फोटो। - फोटो : fatehabad
विज्ञापन

विज्ञापन


प्रदेश भर में सबसे अधिक घाटा झेल रहे जींद बिजली निगम को सरकारी विभागों ने भी नहीं बख्शा है। सरकार विभागों से 29 करोड़ से अधिक की राशि बिजली निगम को लेनी है। एक साल से भी अधिक से यह राशि विभागों में लटक रही है, लेकिन इसका हिसाब नहीं हो रहा। अब सरकार ने ऐसे विभागों और उनकी बिजली निगम को बकाएदारी की सूची मांगी है। इनमें से काफी राशि तो ऐसी है, जिनके कनेक्शन भी कट चुके हैं।
डिफाल्टरों की सूची में सबसे आगे जन स्वास्थ्य विभाग और नगरपरिषद है।

जन स्वास्थ्य विभाग को बिजली निगम के कुल 1035.31 लाख रुपये देने हैं। नगर परिषद को स्ट्रीट लाइट्स के बिल के रूप में 1122.74 लाख रुपये चुकाने हैं। इसके अलावा सिंचाई विभाग को 25.61 लाख रुपये, पंचायत विभाग को 9.39 लाख रुपये व अन्य विभागों की राशि मिलाकर 720.47 लाख रुपये बनती है, जिसका एक साल से बिजली निगम को इंतजार है। हालांकि जींद जिला में बिजली निगम की कुल बकाएदारी करीब 10 हजार करोड़ की है, लेकिन सरकारी विभाग भी इसमें पीछे नहीं हैं।
विज्ञापन


उलझा है नगर परिषद और बिजली निगम का मामला
बिजली निगम और नगर परिषद का मामला आपस में उलझा हुआ है। एक तरफ जहां नगर परिषद बिजली निगम की ओर बकाया बता रहा है, वहीं बिजली निगम के अधिकारी नगर परिषद की ओर बकाया दिखा रहे हैं। इसको लेकर कई बार अधिकारियों की मीटिंग हो चुकी हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है। दरअसल स्ट्रीट लाइट्स का फंड लोगों ने नगर परिषद लेता है और इसका बिल निगम को देना होता है। वहीं बिजली निगम को प्रॉपर्टी टैक्स, बिजली के खंभों का टैक्स व कई भवनों का टैक्स नगर परिषद को देना होता है। यह अभी तक लटक रहा है।


कटे और चालू कनेक्शनों की बकाएदारी
निगम की तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार सिंचाई विभाग के चालू कनेक्शनों की 25.22 लाख रुपये राशि, जन स्वास्थ्य विभाग के चालू कनेक्शनों की 1016.22 लाख रुपये राशि अभी तक नहीं मिली है। वहीं चालू कनेक्शनों में ही नगर परिषद की 1122.74 लाख और अन्य विभागों की 720.47 लाख रुपये राशि शेष है। चालू कनेक्शनों की कुल 2884.65 लाख रुपये की राशि बकाया है, जबकि कटे  कनेक्शनों की महज 28.87 लाख रुपये की राशि ही बकाया है।

आम लोगों के साथ-साथ सरकारी विभागों की ओर भी बिजली निगम की राशि बकाया है। सभी डिफाल्टर विभागों और लोगों की सूची अभी सरकार ने मांगी है। यह सूची भेज दी गई है अब सरकार के स्तर पर ही इसका फैसला होगा। -एमएल रोहिल्ला, एसई बिजली निगम।
विज्ञापन


बिजली निगम ने जो राशि नगर परिषद की तरफ निकाली है, वह गलत है। सारा हिसाब करने पर करीब एक करोड़ रुपये की राशि ही बनती है। यह मामला उच्च स्तरीय मीटिंग में रखा गया है। इसका समाधान कर बिल का भुगतान किया जाएगा। - पूनम सैनी, चेयरपर्सन, नगरपरिषद जींद।

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें