कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल के पास अनुभव की कमी है। इस कारण प्रदेश में अब तक सरकार ढीली चल रही है। जबकि यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का राजनीतिक अनुभव ज्यादा रहा, जिस कारण 30 दिनों में 60 अहम फैसले लिए गए। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल का अनुभव कम होने के कारण निर्णयों मेें देरी रही। वह गांव सिंघाना में अंबेडकर जयंती पर कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार में ही कुछ लोगों को गैर जाट मुख्यमंत्री बर्दाश्त नहीं है, इसलिए वे ताल में ताल मिलाने की कोशिश में है। पार्टी को किसी को बदलने की जरूरत नहीं है, लेकिन सोच बदलकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ फैसलों को तुरंत लेना जरूरी है।
इसमें जातिगत आंदोलनों को खत्म करने के लिए प्रदेश में 100 फीसदी आरक्षण लागू करना, एक परिवार एक रोजगार की नीति बनाना, विभागों के कर्मचारियों की हड़तालों को पाबंदी लगाना, प्राइवेट व सरकारी सेक्टर में वेतन की असमानता को खत्म करना, किसान व मजदूर वर्ग को लेकर संयुक्त नीति बनाकर सभी अधिकारियों की हर विषय पर जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। इससे लोगों में सरकार के प्रति अधिक विश्वास बढे़गा। इस मौके पर सुरेश खत्री, श्याम लाल गुर्जर, डॉ. अशोक, सरपंच सुरेंद्र राणा, सुलतान सैनी, कर्म सिंह, हरिश शर्मा, डॉ. सत्यवान सैन, सुखदेव, सोमपाल वाल्मीकि, विनोद, डॉ. जयराम, जिले सिंह कश्यप, ओम सिंह, योगेंद्र, संजीव, गुरमेज, गोविंद सैनी, रतन सिंह बैरागी, अमित आदि मौजूद रहे।
हुड्डा ने किया प्रदेश का माहौल खराब
सांसद सैनी ने कहा कि प्रदेश में भाईचारे को खराब करने का काम पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किया। उन्होंने समाज में असमानता का बीज बो कर अराजकता को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि वह जाटों के आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि 100 फीसदी आरक्षण को लागू करने के पक्षधर है। जाति की जनसंख्या जितनी है, उसका उतना ही आरक्षण हो। इसमें किसी का विरोध करने का सवाल ही नहीं उठता।