निजी बसों के परिचालन पर रोडवेज कर्मचारियों की तनातनी के बीच शनिवार को चंडीगढ़ में प्रदेश के परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार और रोडवेज कर्मचारियों की संयुक्त संघर्ष समिति के बीच बातचीत हुई। इसमें सहमति बनी बनी कि नई पॉलिसी के तहत आई किसी भी बस को रूट पर नहीं चलने दिया जाएगा। 1993 की परिवहन नीति और इसके नए स्वरूप के तहत ही बसों को चलाया जाएगा। वहीं जींद में रोडवेज कर्मचारियों और निजी ऑपरेटरों के बीच वीरवार को हुई कहासुनी के चलते बस स्टैंड पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि शनिवार को रोडवेज कर्मचारियों ने धरना नहीं दिया। नई परिवहन नीति के तहत आई बसें भी बस स्टैंड में नहीं घुसीं।
ग्रामीण रूटों पर चलेंगी बस
रोडवेज कर्मचारियों के अनुसार 1993 की परिवहन नीति के तहत कोई भी बस दूसरे जिले तक नहीं जा सकती। निजी बसों को सिर्फ ग्रामीण रूटों पर ही परमिट दिया गया था। इससे कोई ऐतराज भी कर्मचारी यूनियन को नहीं है। कुछ बसों के परमिट बढ़ाकर मेन रूट पर भी किया गया था, उनके परिचालन से भी रोडवेज कर्मचारियों को कोई आपत्ति नहीं है। नए फैसले से 16 रूटों पर 64 बसों के परिचालन पर असमंजस की स्थिति बनी है।
रोडवेज कर्मचारियों और परिवहन मंत्री के बीच हुई बातचीत में नई परिवहन नीति के तहत जारी किए गए परमिटों पर बस नहीं चलाने का फैसला हुआ है। पुराने रूटों और परिवहन नीति पर बसों के चलने से रोडवेज यूनियनों को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन 2016 की परिवहन नीति पर बस नहीं चलने दी जाएंगी। -महीपाल बिघाना, सदस्य संयुक्त संघर्ष समिति।