हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद शहर को अतिक्रमण से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। हालांकि प्रशासन ने एक साल पहले दिसंबर माह में ही अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया था, लेकिन अभी तक 50 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हुआ है। अब जनवरी माह में इसकी हाईकोर्ट की समय सीमा समाप्त हो रही है।
शहर की एक सामाजिक संस्था अन्ना टीम ने शहर के अतिक्रमण को अदालत में चुनौती दी थी। इसके बाद फैसला आया और अदालत ने जींद प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए। प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से कार्रवाई शुरू की और मेन बाजार में अतिक्रमण पर प्रशासन ने कार्रवाई की। यहां करीब 150 दुकानों के बाहर से अतिक्रमण हटाया गया। इससे मेन बाजार की सड़क दोनों ओर से करीब चार फुट तक चौड़ी हो गई। हालांकि बैंड मार्केट, अग्रवाल मार्केट व रोहतक रोड सहित कई जगह अतिक्रमण हटाया गया, लेकिन पंजाबी बाजार व पुरानी अनाज मंडी-काठमंडी में आकर नगरपरिषद का अभियान रुक गया। तीनों ही जगह अतिक्रमण हटाने का अभियान तो शुरू हुआ, लेकिन यह पूरा नहीं हो सका।
कॉलोनियों में स्थिति बदतर
हालांकि, बाजार में पक्का अतिक्रमण हटा दिया गया, लेकिन कॉलोनियों में स्थिति अब भी पहले की तरह ही बनी हुई है। शहर की अधिकतर कॉलोनियों में अतिक्रमण है। शिव कॉलोनी और हाऊसिंग बोर्ड में अतिक्रमण की स्थिति सबसे खराब है। हाऊसिंग बोर्ड में हर गली में लोगों ने पांच से सात फुट तक अतिक्रमण किया है।
हाऊसिंग बोर्ड की स्थिति
हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी में करीब 1300 मकान हैं। इनमें से एक हजार से अधिक ने गलियों में अतिक्रमण किया है। नगरपरिषद सूत्रों के अनुसार हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी में बने मकानों को लोगों ने अपनी तरह से बदल लिया है। जबकि यह हाऊसिंग बोर्ड द्वारा तैयार की गई प्लांड कॉलोनी है। इसके चलते ही यहां अतिक्रमण हुआ है। अब प्रशासन यहां नोटिस देने की तैयारी में है।
अतिक्रमण में दबी सीवरेज लाइन
हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी में अतिक्रमण का आलम यह है कि यहां सीवरेज लाइन तक अतिक्रमण में दब चुकी है। इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर दोबारा से लाइन डाली है।
जिला प्रशासन को छह जनवरी तक हाईकोर्ट में अतिक्रमण पूर्ण रूप से हटाकर रिपोर्ट देनी है। इसके विपरीत अब तक शहर से अतिक्रमण नहीं हटा है।- हितेश हिंदुस्तानी, सदस्य, अन्ना टीम
अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई चल रही है। इसमें समय लगता है, लेकिन माननीय अदालत के आदेश पर कार्रवाई पूरी की जाएगी। जहां भी अतिक्रमण बचा है, उसे हटाया जाएगा। -डॉ. एसके चौहान, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, जींद।