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सरकार और भाजपा को साफ चेतावनी, जाटों का कमजोर न समझें

Thu, 24 Dec 2015 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला जींद
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जाट आरक्षण अधिकार रैली में प्रदेश की सबसे लड़ाका मानी जाने वाली कंडेला खाप बिखरी हुई नजर आई। जहां खाप के प्रधान टेकराम कंडेला ने रैली से दूरी बनाई, वहीं आयोजकों ने दावा किया कि कंडेला गांव और कंडेला खाप से सैकड़ों लोग रैली में आए हैं। रैली के मंच से जाट नेताओं ने साफ किया कि भाजपा और केंद्र तथा राज्य की सरकार जाटों को कमजोर नहीं समझें।
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रैली आयोजन सेक्टर नौ स्थित राजीव गांधी खेल परिसर में किया गया। बेशक यह जमीन फिलहाल हुडा ने अधिग्रहीत कर रखी है, लेकिन मूल रूप से हैबतपुर गांव की जमीन है। हैबतपुर गांव कंडेला खाप के अंतर्गत आने वाला महत्वपूर्ण गांव है। कंडेला खाप में 28 गांव व 24 खेड़े आते हैं, जिसमें कंडेला गांव और आसपास के गांव शामिल हैं।

कंडेला खाप के लिए कहावत भी है, 28 कंडेले 24 खेड़े भिरड़ां के छाते किसने छेड़े। वैसे भी जींद में आंदोलन के दौरान कंडेला खाप की अहम भूमिका रही है। बिजली के बिल भरवाने के विरोध में 2002 में हुए कंडेला कांड ने ही प्रदेश की राजनीति को बदल दिया था। ऐसे में कंडेला खाप में बिखराव सभी को अखर रहा है।
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कंडेला खाप के प्रधान टेकराम कंडेला ने रैली से दूरी बनाई। वहीं, ढुल खाप ने भी रैली पर सवाल उठाए थे। दोनों ही क्षेत्र की महत्वपूर्ण खाप हैं। इसके बावजूद बुधवार को रैली में कंडेला और ढुल खाप से भारी भीड़ उमड़ी। इससे सर्व जाट खाप नेता सूबे सिंह समैण इन दोनों खापों में सेंध लगाने में सफल रहे।

इस दौरान जम्मू कश्मीर से जाट नेता कमल सिंह, सर्व जाट खाप के अध्यक्ष नफे सिंह नैन, सूबे सिंह समैण, धर्मपाल छौत, रघुबीर नैन, महेंद्र सिंह नैन, ईश्वर सिंह नैन, झाड़सा 360 के प्रधान महेंद्र सिंह ठाकरान, महेंद्र सिंह ढुल, बूरा खाप के प्रधान हरिनारायण बूरा, रणधीर सरोहा, मास्टर फूलकुमार पेटवाड़, संतोष दहिया मौजूद रहे।

दमन से अलग देश बन लेंगे जाट
रैली के दौरान झाड़सा 360 के प्रधान महेंद्र सिंह ठाकरान ने कहा कि जिस प्रकार हिटलर के दमन के कारण यहुदियों ने अलग देश बना लिया था, ऐसे ही वर्तमान सरकार के दमन के कारण जाट भी अलग देश बना लेंगे।

कंडेला गांव और खाप से 100 वाहन
रैली के मंच से कंडेला खाप के ईश्वर सिंह कंडेला ने कहा कि कंडेला गांव से 30 और कंडेला खाप के गांवों से 70 वाहन आए हैं। मंच से यह इसलिए बताया कि जो लोग रैली में साथ नहीं दे रहे, उनको इसका पता लग जाए।

कंडेला खाप से ही आई महिलाएं
रैली में करीब दो दर्जन महिलाएं ही पहुंची थी। ये महिलाएं दरियावाला गांव से ही आई थी। दरियावाला गांव भी कंडेला खाप का गांव हैं। इसको मंच से खूब प्रचारित किया गया।

पांच साल बाद फिर आंदोलन की राह पर जाट
जाट आरक्षण के लिए यूं तो 2008 में आंदोलन शुरू हुआ था, लेकिन 2010 आते-आते यह उग्र हो गया। 13 सिंतबर 2010 को जाटों ने हिसार जिला के मय्यड़ गांव में आंदोलन शुरू किया। यहा लाडवा गांव के एक युवक की मौत हो गई। इसके बाद छह मार्च 2011 को जींद में जाटों दिल्ली-बठिंडा रेलवे ट्रैक जाम कर दिया। 20 दिन बंद रहने के बाद 25 मार्च को जींद के रेस्ट हाउस में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तथा जींद जाट प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई, जिसमें आंदोलन समाप्त करने पर सहमति बनी। इसके चलते 26 मार्च को दोबारा रेल मार्ग दोबारा बहाल हुआ। अब फिर से जाटों ने 15 फरवरी को आंदोलन का एलान कर दिया है।

बुजुर्गों को टीस, युवा कम
बेशक आरक्षण का सबसे अधिक असर युवाओं पर पड़ना है, लेकिन बुधवार को हुई रैली में बुजुर्गों की संख्या ही अधिक रही। रैली की विशेषता यह रही कि गांव से अधिक से अधिक लोग पहुंचे। अधिकतर युवा वालंटियर ही थे।
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