जींद। शहर की कई गलियां पूरी तरह टूट चुकी हैं। बरसात और सीवरेज के पानी से गलियों में कीचड़ जमा रहता है। राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में हालत इतने खराब हैं कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है। यह बात शहरवासियों ने अर्बन इस्टेट में आयोजित अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में कही।
पूर्व पार्षद मोना, सुनील रेढू, जयपाल मलिक और विकास जांगड़ा ने मूलभूत सुविधाओं की बदहाली को लेकर प्रशासन और सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई।
उन्होंने टूटी गलियों, पेयजल संकट, सीवरेज ओवरफ्लो और शहर में फैली गंदगी की समस्या उठाते हुए कहा कि लंबे समय से हालात जस के तस बने हुए हैं लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। बरसात से पहले नालों की सफाई तक नहीं करवाई गई।
शहरवासियों ने संवाद कार्यक्रम में बाहरी कॉलोनियों में पेयजल संकट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में समय पर पानी की सप्लाई नहीं हो रही। कई क्षेत्रों में पेयजल पाइपलाइन लीकेज होने से गंदगी मिला पानी घरों तक पहुंच रहा है। इससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। महिलाओं को पानी भरने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। समस्या का समाधान होना चाहिए।
जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर शहर की सुंदरता बिगाड़ रहे
शहरवासियों ने सीवरेज व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कई इलाकों में सीवरेज लाइनें बंद पड़ी हैं। इससे गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। इससे दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए लोगों ने कहा कि जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर शहर की सुंदरता बिगाड़ रहे हैं।
मूलभूत समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए
शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की कि शहर की मूलभूत समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए। टूटी गलियों की मरम्मत, पेयजल व्यवस्था सुधारने, सीवरेज लाइनें दुरुस्त करने और नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं ताकि शहरवासियों को राहत मिल सके। इस मौके पर कर्मपाल, रमेश नैन, मोनू सैनी समेत अनेक लोग मौजूद रहे।