जींद। राजकीय महिला कॉलेज में प्राध्यापिका सुमिता आसरी छात्राओं को भविष्य में आगे बढ़ाने के लिए उनके साथ अध्यापिका का नहीं बल्कि एक दोस्ताना व्यवहार रखती है। इसके कारण वर्षों पहले कॉलेज से पासआउट हुई छात्राएं भी आज तक उनसे जुड़ी हैं। वह पढ़ाई में कमजोर छात्राओं को घर पर भी शिक्षा देती है ताकि वह आगे बढ़ सकें।
कॉलेज में होने वाली प्रत्येक तरह की सांस्कृतिक गतिविधियों में सुमिता की मुख्य भूमिका होती है। इसमें वह हर इवेंट में छात्राओं को मोटिवेट कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। उनके द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों व अन्य गतिविधियों में भाग लेकर स्टेट से नेशनल तक नाम कमाया है।
शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने पर वर्ष 2024 में गणतंत्र दिवस पर बिजली मंत्री रणजीत सिंह चौटाला ने उनको सम्मानित भी किया था। सुमिता आसरी छात्राओं को शिक्षा देने के लिए कक्षा कक्ष तक ही सीमित नहीं है बल्कि वह कमजोर छात्राओं को शिक्षा की मुख्य धारा में लाने के लिए अलग से कक्षा लगाकार उनको संदेह को क्लीयर करती हैं।
इस तरह से उन्होंने कई छात्राओं को नेट की अलग से तैयारी करवाई और उनकी परीक्षा को पास करवाने में मुख्य भूमिका निभाई। वह कॉलेज में शिक्षा तक सीमित न होकर भारत विकास परिषद के साथ जुड़कर समाज में देश के लिए जागरूकता लाने का भी काम कर रही है।
इसके लिए स्कूलों में विद्यार्थियों को जागरूक करना, समाज में जरूरतमंदों की सहायता करने में उनकी विशेष रूचि है। शहर में कई विभागों कार्यरत उनके स्टूडेंट आज भी उनसे मिलने के लिए आते हैं।
उनके मोटिवेट के लिए आभार जताते हैं। कॉलेज में जो छात्राएं मंच पर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाती थी।वह शिक्षा के अतिरिक्त छात्राओं को देश के उत्थान में वह किस प्रकार की भूमिका निभा सकती हैं।
17जेएनडी37: सुमिता आसरी।