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Jind News: भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने कर दी तकनीकों की जानकारी

Mon, 14 Apr 2025 11:53 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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14जेएनडी08-किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. सुभाष चंद्र। स्रोत किसान
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जींद। हरियाणा में किसान अपनी खेती-बाड़ी के बारे में कृषि विशेषज्ञों और कृषि इनपुट विक्रेताओं से तो सलाह लेते ही हैं, गांव में स्थित पैक्स जैसी वित्त संस्थाओं के संपर्क में भी आमतौर पर किसान रहते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पैक्स के कर्मचारियों को भी कृषि में वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी की जरूरत महसूस की गई।
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हरियाणा सरकार ने कृषि व किसान कल्याण विभाग के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान हमेटी में इस बारे में पैक्स से संबंधित प्रबंधकों और सेल्समैनों के कृषि प्रशिक्षण की शुरुआत कर अच्छा कदम उठाया है।
हमेटी के निदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि जिला जींद की विभिन्न पैक्स के 31 प्रबंधक और सेल्समैनों को 15 दिवसीय फसलों में समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन का कोर्स कराया जा रहा है, जिसमें फसलों की अच्छी पैदावार लेने और भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। मिट्टी और पानी की जांच का महत्व और तरीके के बारे में भी पूरी जानकारी प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान दी गई, ताकि वे समय पर सही सलाह देकर फसल उत्पादन में किसानों की मदद कर सके। प्रशिक्षण में पैक्स के प्रबंधकों और सेल्समैनों को प्राकृतिक खेती के महत्व व तौर तरीकों बारे भी सिखाया गया ताकि वे किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर सकें। हमेटी में प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने जहर मुक्त भोजन उपलब्ध कराने के लिए रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती के तौर तरीके सिखाए। भारत सरकार की ओर से शुरू किए गए प्राकृतिक खेती के राष्ट्रीय मिशन योजना की जानकारी भी डॉ. सुभाष चंद्र ने प्रशिक्षणार्थियों को दी।
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अहिरका के ऑर्गेनिक फार्म का किया भ्रमण
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. हरभगवान कंबोज के नेतृत्व में प्रशिक्षणार्थियों का गांव अहिरका के ऑर्गेनिक फार्म पर शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। यहां पर प्रशिक्षणार्थियों ने प्राकृतिक तरीके से पैदा की जा रही अमरूद, करौंदा, नींबू, एलोवेरा, हल्दी, गेहूं, लहसुन, गुलाब, कटहल और सब्जियों की खेती देखी। फार्म पर महिला किसान सुमित्रा रानी ने कहा कि ये सब फसलें केवल जीवामृत, घनजीवामृत, गोबर की खाद के प्रयोग से उगाई जा रही है, जिनकी मूल्य संवर्धन उपरांत बिक्री की जाती है।
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