जींद। प्रदेश सरकार के कार्यकाल का यह अंतिम बजट होगा। इससे जिले के उद्योगपतियों को बड़ी उम्मीदें हैं। उद्योगपतियों की मांग है कि जिले को अगर सरकार उद्योगों का हब बनाना चाहती है तो इसके लिए विशेष पैकेज की व्यवस्था की जाए। जिससे ज्यादा उद्योग खड़े किए जा सकें। यहां पर बिजली की कमी के कारण उद्योग चलाना आसान नहीं है। 24 घंटे बिजली दी जाए और यूनिटों के रेट भी कम किए जाएं।
उद्योगपतियों की मांग है कि सरकार को उद्योग लगवाने के लिए सबसे पहले तो लाइसेंस की प्रक्रिया आसानी बनानी चाहिए। अगर कोई उद्योग लगाना चाहता है तो वह वर्ष भर तो लाइसेंस के कागजात भी पूरे नहीं कर पाता। एक ही कार्यालय से उद्योग के लिए एनओसी जारी की जानी चाहिए। उद्योगपतियों के लिए औद्योगिक क्षेत्र काटकर सस्ते रेट पर या फिर अनुदान के तहत प्लाट दिए जाए। जमीन के रेट ज्यादा होने के कारण नया उद्योग लगाना सबसे कठिन कार्य है। युवाओं को इस क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए अलग से कोई प्रशिक्षण संस्थान बनाना चाहिए, ताकि शिक्षित युवा नौकरियों की बजाए, खुद के कार्य को करने के लिए आगे आएं और दूसरों को भी रोजगार दे सकें। उद्योगों के लिए नाममात्र के ब्याज पर युवाओं को लोन दिलवाया जाए, जिससे नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
उद्योगपतियों को दिया जाए विशेष पैकेज
प्रदेश में उद्योगपति आज नुकसान में चल रहे हैं। इनको उभारने के लिए सरकार द्वारा विशेष पैकेज देने की जरूरत है, ताकि इनको राहत मिल सके। इसके अलावा सस्ती बिजली, कम दर पर लोन उपलब्ध करवाया जाए। इससे जिले में उद्योगों की संख्या बढ़ेगी और बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा। - नवीन मेहंदीरत्ता।
लाइसेंस की प्रक्रिया को बनाया जाए आसान
उद्योग लगाने के लिए लाइसेंस प्रक्रिया को आसान बनाया जाए, उद्योग लगाने के लिए लाइसेंस प्रक्रिया बहुत ज्यादा जटिल होने के कारण उद्योगपति इसके लिए कागजी कार्रवाई में उलझे रहते हैं। इसके लिए एक छत के नीचे ही सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए। एमएसएमई के नाम पर सरकार केवल बजट खर्च करने का दिखावा कर रही है। जिसके चलते उद्योपतियों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। -अमित बत्रा।
उद्योगों के लिए सस्ती जमीन की जरूरत
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सस्ती जमीन उपलब्ध करवाने की उम्मीद है, ताकि युवाओं का रुझान भी उद्योगों की तरफ बढ़े। महंगे लोन, महंगी जमीन, लाइसेंस की जटिल प्रक्रिया के कारण नए उद्योगों को लगाने के लिए कोई भी आगे नहीं आ रहा। इसके कारण जिले से उद्योग लगातार कम हो रहे हैं। इनको बढ़ावा देने के लिए सरकार को विशेष पैकेज देकर राहत देनी चाहिए। - रोहित।
1992 में बना आद्यौगिक क्षेत्र, अब तक नहीं हुआ सुधार
जिले में 1992 में आ औद्योगिक क्षेत्र बनाया गया था। उसके बाद यहां पर कोई विस्तार नहीं हुआ। इसमें मुलभूत सुविधाएं भी अब तक सरकार उपलब्ध नहीं करवा पाई। जिसके चलते यहां से व्यापारी पलयान करने पर मजबूर हैं। अब सरकार से उम्मीद है कि औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार करवाया जाए। -अभिषेक गोयल।
17जेएनडी15: नवीन मेहंदीरत्ता।
17जेएनडी15: नवीन मेहंदीरत्ता।
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