21वीं सदी में भी बाल विवाह जैसी कुप्रथा रह-रहकर सिर उठा रही है। बाल विवाह को रोकने के लिए सरकार द्वारा बनाए गए बाल विवाह अधिनियम के बावजूद बाल विवाह का चलन थम नहीं रहा है। जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध कार्यालय के आंकड़ों पर अगर नजर डाली जाए तो पिछले छह साल में बाल विवाह के मामले लगभग 15 गुणा बढ़े हैं। लोगों में जागरूकता का अभाव या फिर परिवार की आर्थिक तंगी बाल विवाह की मुख्य जड़ है। बाल विवाह के मामले उजागर होने का एक मुख्य कारण लड़कियों का जागरूक होना भी है। करीब 70 फीसदी मामलों में लड़कियों ने खुद इनकी शिकायत दी है।
बाल विवाह को खत्म करने के लिए वर्ष 2006 में बाल विवाह निषेध अधिनियम बनाया गया। इसके लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं, लेकिन सरकार तथा विभाग के प्रयासों के बावजूद बाल विवाह का चलन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।
लड़की को आज भी समझा जाता है जिम्मेदारी
जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी के कार्यालय में पहुंच रहे बाल विवाह के ज्यादातर मामलों में यह सामने आया है कि परिवार के लोग आज भी लड़की को एक जिम्मेदारी समझते हैं। जिम्मेदारी निभाने के लिए ही ज्यादातर अभिभावक बाल अवस्था में लड़की को विवाह के बंधन में बांध देते हैं।
दो साल की सजा व एक लाख के जुर्माने का है प्रावधान
बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह करवाने के आरोप में दो साल की सजा तथा एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, बाल विवाहित लड़का या लड़की बालिग होने के दो साल के अंदर अपना विवाह खारिज करवा सकता है।
इस तरह मामले आए सामने
वर्ष मामले
2010 4
2011 11
2012 4
2013 7
2014 19
2015 36
2016 61
2015 में 14 तो 2016 में मिली 6 झूठी शिकायतें
जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध कार्यालय को 2015 में बाल विवाह की कुल 36 शिकायतें मिलीं। इनमें 22 शिकायतें सही मिली तो 14 झूठी पाई गईं। यानी 14 शिकायतों में दूल्हा-दुल्हन बालिग पाए गए। वहीं, 2016 में बाल विवाह निषेध कार्यालय के पास बाल विवाह की कुल 61 शिकायतें आई हैं। इनमें करीब 42 शिकायतें खुद लड़कियाें ने दी हैं। कुल शिकायतों में 55 शिकायतें सही तो छह शिकायतें झूठी मिलीं।
लड़कियों में बढ़ रही है जागरूकता
बाल विवाह के ज्यादा मामले सामने आने का मुख्य कारण यह है कि बाल विवाह को लेकर लड़कियों में जागरूकता बढ़ रही है। बाल विवाह निषेध कार्यालय के अधिकारियों की मानें तो उनके पास आने वाली ज्यादातर शिकायतें खुद वही लड़कियां करती हैं, जिनकी बालावस्था में शादी करवाई जा रही होती है। लड़कियों में जागरूकता बढ़ने के कारण ही अब बाल विवाह के मामले उजागर हो जाते हैं।
गुप्त रखी जाती है शिकायतकर्त्ता की पहचान
कोई भी व्यक्ति 1091 पर बाल विवाह की सूचना दे सकता है। विभाग द्वारा बाल विवाह की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाती है। विभाग के पास आने वाले ज्यादातर मामलों में यह सामने आया है कि परिवार की आर्थिक तंगी के कारण बाल विवाह की घटनाएं हो रही हैं। वहीं लड़कियों के प्रति अभी लोगों की मानसिकता में ज्यादा परिवर्तन नहीं हुआ है। ज्यादातर लोग आज भी लड़की को जिम्मेदारी समझते हैं। इसलिए इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए वह जल्द से जल्द उसकी शादी करना चाहते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। बाल विवाह को रोकने के लिए विभाग द्वारा कड़ी निगरानी की जा रही है।
रवि लौहान, सहायक जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध विभाग, जींद