जींद। प्रदेश सरकार के 23 फरवरी को जारी होने वाले बजट से जिलावासियों को बड़ी उम्मीदें हैं। जिले में औद्योगिक क्षेत्र नहीं होने से नौकरी के लिए दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद समेत अन्य क्षेत्रों में जाकर कम वेतन में काम करना पड़ रहा है। इसके कारण वहां पर होने वाले खर्च को निकालकर युवाओं को ज्यादा मुनाफा नहीं होता। इसके विपरीत अगर जिले में उद्योग लगेंगे तो यहां के युवाओं को इतने ही वेतन में काम करके अच्छी आमदनी हो सकती है। इसके अलावा जिले की टूटी सड़कों के सुधार की आस है। इससे दूर के क्षेत्र में नौकरी करने वाले युवाओं को रात के समय यातायात की दिक्कत न रहे। जिले में बन रहे मेडिकल कॉलेज को इसी वर्ष शुरू करवाने की आस है। जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था नहीं है। इसके बनने से यहां पर विकास होगा। युवाओं को रोजगार मिलने के साथ इमरजेंसी में दिल्ली, हिसार व रोहतक जाने से पीछा छूटेगा। बड़े शहरों की तर्ज पर निजी कंपनियों को कर में राहत देकर यहां पर निवेश करवाया जाए। इससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे। विश्वविद्यालय में सभी कोर्स शुरू करवाए जाएं। इससे जिले में शिक्षा का स्तर बढ़ सके और युवाओं को बेहतर नौकरियां मिलें।
यातायात की सबसे बड़ी परेशानी
जिले में यातायात की सबसे बड़ी दिक्कत है। रात के समय नौ बजे के बाद जिले के किसी भी रूट पर रोडवेज बस व अन्य किसी प्रकार के वाहन नहीं है। वाहन की व्यवस्था हो ताकि रात के समय दूर के क्षेत्र से नौकरी कर वापस आने वाले अपने घर पर जा सकें। इसके अलावा टूटी सड़कों के कारण भी जिला पूरी तरह से पिछड़ रहा है। जिले की मुख्य सड़कों से लेकर अन्य ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें पूरी तरह से बदहाल हैं। इनका सुधार विकास के लिए जरूरी है। -रविंद्र कुमार।
इसी वर्ष मेडिकल कॉलेज शुरू होने की उम्मीद
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है। किसी भी प्रकार की दुर्घटना या इमरजेंसी में इलाज के लिए जिले में सरकारी से लेकर निजी अस्पताल तक सुविधाओं का भारी टोटा है। अगर इस वर्ष में ही बजट के दौरान सरकार मेडिकल कॉलेज शुरू करवाए तो जिले के लोगों के लिए अच्छा होगा। आपात स्थिति में जिलावासी जब तक रोहतक, हिसार या फिर अन्य शहरों में जाते हैं तो वहां पर पीड़ित दम तोड़ चुका होता है, इसलिए इस बजट में सरकार मेडिकल कॉलेज में इलाज की व्यवस्था शुरू करवाए। -राजेश शर्मा।
उद्योगों को दे बढ़ावा
जिला रोजगार के मामले में लगातार पिछड़ रहा है। यहां के युवाओं को दूसरे प्रदेशों या फिर गुरुग्राम समेत दूर के शहरों में जाकर नौकरी करनी पड़ रही है। अगर यहां पर उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए तो युवाओं को अपने गृह जिले में ही बेहतर रोजगार मिल सकेगा। युवाओं को वहां पर रहने व खाने तथा आने-जाने में बर्बाद होने वाले समय को बचाया जा सकेगा। इससे जिले में उन्नति होगी। -सिद्धार्थ शर्मा।
विश्वविद्यालय व कॉलेजों में शुरु किए जाएं रोजगारपरक कोर्स
जिले के विकास में शिक्षा का विशेष महत्व है। जिसके लिए बेहतर शिक्षा की आवश्यकता होती है। जिले में शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय है, लेकिन यहां पर रोजगारपरक कोर्स नहीं हैं। यही हाल कॉलेजों का है। इनमें भी केवल परंपरागत शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसी भी क्षेत्र का विकास वहां की जनता से जुड़ा होता है। अगर शिक्षा के दौरान ही युवाओं को किसी विशेष क्षेत्र में पारंगत किया जाए तो भविष्य में वह बेहतर काम कर सकता है। इसलिए रोजगार परक कोर्स विद्यार्थियों को करवाए जाएं। -मीना मलिक
14जेएनडी10: सिदार्थ शर्मा।
14जेएनडी10: सिदार्थ शर्मा।
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