जींद। यदि चीनी मिल कुछ दिन और बंद रही तो इससे गन्ना उत्पादक किसानों को भारी नुकसान होने की संभावना है। जितनी देरी मिल चलने में होगी, उतना ही गन्न सूख जाएगा और उसका वजन कम हो जाएगा। इसके अलावा जो मजदूर अब खेतों में काम कर रहे हैं, वह बिना काम रूक नहीं पाएंगे। यदि इन मजदूरों को दोबारा लाना पड़ा तो काफी खर्च होगा।
पिछले पांच दिन से चीनी मिल बंद है और किसानों का गन्ना खेतों में ही खड़ा है। जिले में 17150 एकड़ में गन्ने की फसल है और 39 लाख तीन हजार क्विंटल गन्ने की पेराई होनी है। अभी तक लगभग 10 लाख क्विंटल गन्ने की ही पेराई हुई है। तीन चौथाई गन्ना अभी तक किसानों के खेतों में ही खड़ा है। कई किसानों ने तो गन्ना खेतों में छीलकर रखा हुआ है और कुछ का खेतों में ट्रॉलियों में ही भरा पड़ा है। ऐसे में जो गन्ना छीलकर रखा हुआ है और ट्रॉलियों में भरा है, उसमें बहुत ज्यादा नुकसान हो जाएगा। वह गन्ना सूख जाएगा और उसका वजन आधे से भी कम रह जाएगा। इसके अलावा खेतों में खड़ा गन्ना यदि एक महीने में और मिल में नहीं पहुंचा तो इसका वजन भी 30 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। इस प्रकार दोनों की अवस्थाओं में किसानों को नुकसान हो रहा है।
10 नवंबर से शुरू हुआ था चीनी मिल
सहकारी चीनी मिल 10 नवंबर से शुरू हुआ था। दो महीने मिल चला और अब मिल बंद हो गई है। इससे किसानों का गन्ना खेतों में ही रुक गया है। यदि मिल लगातार चलती तो यह जून महीने तक चलती। अब जितनी देरी मिल चलने में होगी, उतनी ही देरी तक मिल चलेगी और इससे किसानों की अगली फसल की बिजाई में भी देरी होगी।
मजदूर भी नहीं मिलेंगे
गांव जलालपुर कलां के सरपंच रामपाल जागलान ने कहा कि उसने 28 एकड़ में गन्ना लगाया हुआ है। अब तक उसका आठ एकड़ का गन्ना मिल में पहुंच चुका है लेकिन 20 एकड़ में गन्ना खड़ा है। बिना काम के मजदूरों को भी खेतों में नहीं रोका जा सकता। जितना मिल देरी से चलेगी, उतना ही उनको नुकसान होगा। गन्ना सूख जाएगा, जिससे उसका वजन कम हो जाएगा, लेकिन वह किसानों के साथ हैं।
किसानों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। मिल बंद होने से किसानों को भी नुकसान हो रहा है। किसानों को गन्ना मिल में लेकर आना चाहिए और सरकार से बातचीत करनी चाहिए। मिल रुकने से किसानों को ही नुकसान होगा। किसान शांतिपूर्वक मिल के बाहर अपना धरना जारी रखें लेकिन मिल को भी चलने दें।
-प्रवीण कुमार, प्रबंध निदेशक सहकारी चीनी मिल।