विश्राम गृह में पत्रकारों से बात करते हुए नवीन जयहिंद। संवाद
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जींद। आम आदमी पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने 14641 जिंदा बुजुर्गों को मृत दिखाकर पेंशन काट दी। इसके अलावा 18,551 विधवाओं को शादीशुदा दिखाकर पेंशन रोकी गई। पूरे प्रदेश में 175298 लोगों की पेंशन को रोका गया है।
प्रदेश में पेंशन रोकने व काटने के विरोध में नवीन जयहिंद ने शुक्रवार को लोकनिर्माण विश्राम गृह में पत्रकार वार्ता कर मुख्यमंत्री को चेताया कि अगर दिवाली तक सभी बुजुर्गों की पेंशन दोबारा से शुरू नहीं की गई तो वह मुख्यमंत्री आवास पर दीवाली के दिन पूरे प्रदेश से वाहनों में गोसे (उपले) लेकर जाएंगे और बुजुर्गो की तरफ से भेंट करेंगे। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार कह रही थी कि 60 वर्ष उम्र होते ही खुद ही पेंशन बन जाएगी, लेकिन दो लाख बुजुर्ग ऐसे हैं जिनकी पात्र होने के बावजूद पेंशन नहीं बनी है।
उन्होंने कहा कि 175298 लोगों की पेंशन काटी गई। इसमें से परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के नाम 1,56,000 से अधिक लोगों की पेंशन काटी गई है। रजिस्ट्रार कार्यालय से पुष्टी के आधार 70640 लोगों की पेंशन काटी गई है। 14641 लोगों को मुर्दा घोषित किया गया है। इसके अलावा 18551 विधवाओं को शादीशुदा दिखाया गया है। 33616 लोगों को सेवानिवृत सैनिक दिखाया गया है। इसके अलावा 4500 दिव्यांगों की भी पेंशन काटी गई है। 34703 लोगों को आय अधिक दिखा कर पेंशन काटी गई है, जबकि इनकी वास्तविक आय 50 हजार रुपये भी नहीं है।
जयहिंद ने कहा कि सरकार के मंत्री अलग-अलग जगह राणव के पुतले फू केंगे। रावण का पुतला वही फूंके जो राम जैसा हो। नहीं तो लोगों को मंत्रियों के पुतले फूंकने चाहिएं। स्कूल बंद करने पर शिक्षामंत्री, चिकित्सकों की कमी पर स्वास्थ्यमंत्री, सडक़ों की खराब स्थिति पर सड़क मंत्री का पुतला जलाया जाना चाहिए। सरकार बुजुर्गों, विधवाओं व दिव्यांगों की पेंशन काट रही है। यह बुजुर्गों के मान सम्मान की बात है। ताऊ देवीलाल ने पेंशन शुरू की थी तब इसमें आय का कोई भी आधार नहीं था। अब सरकार अलग-अलग आधार बना कर पेंशन काट रही है। इस दौरान उन्होंने अपना नंबर भी जारी किया। यदि सरकार द्वारा जारी नंबर पर बात करने से पेंशन नहीं बनती है तो उन्हें फोन कर सकते हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुछ लोग चौधरी देवीलाल के नाम से वोट खाने वाले लोग आज नोट खा रहे हैं। पेंशन के नाम पर बोल नहीं रहे हैं। खुद को चौधरी देवीलाल की विरासत बताने वाले उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को भी बुजुर्गों के पक्ष में आकर इस्तीफा देना चाहिए।