जींद। भगवान महावीर स्वामी ने पिल्लूखेड़ा मंडी में आयोजित सत्संग समारोह में कहा है कि हमें हमारी मातृभाषा ही बोलनी चाहिए। क्योंकि मातृभाषा से ही हमारी पहचान बनती है। अच्छे व्यवहार, मीठे वचनों व सद्गुणों से ही आपकी पहचान बनती है। ऐसी बोली बोलनी चाहिए, जो सभी को अच्छे प्रकार से समझ में आ जाए। व्यक्ति को बोलने से पहले सोचना भी चाहिए, सबसे प्रेम से मीठा बोलकर व्यवहार करें। कड़वा बोलने से अपने भी पराए हो जाते हैं। इस प्रकार कोयल अपनी मीठी वाणी से सबका मन मोह लेती है, ठीक उसी प्रकार से सबसे मीठा बोलें, ताकि आपकी भी प्रशंसा हो सके। यह प्रवचन सुमेर मुनि व श्रेयांश मुनि ने दीं। संवाद