जिसके बाद टीम ने अस्पताल की जमीन को मेडिकल कॉलेज के लिए नाकाफी बताया है। ऐसे में प्रशासन ने अब अन्य विकल्पों पर काम शुरू कर दिया है।
पीजीआई रोहतक के निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज करनाल के निदेशक डॉ. सुरेंद्र कश्यप व मेडिकल एजुकेशन के उप निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद की टीम ने सामान्य अस्पताल परिसर का निरीक्षण कर यहां मेडिकल कॉलेज की संभावनाओं को जांचा।
टीम को अस्पताल की खाली जगह कॉलेज के लिए नाकाफी मिली। जिसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने डीसी विनय सिंह से मिलकर मेडिकल कॉलेज के लिए कम से कम 20 एकड़ जमीन मुहैया करवाने को कहा।
नौ एकड़ जमीन कॉलेज के लिए कम
23 एकड़ में बने सामान्य अस्पताल में करीब नौ एकड़ जमीन खुली बचती है। लेकिन मेडिकल कॉलेज के लिए कम से कम 20 एकड़ जमीन की जरूरत है।
ये हैं विकल्प
प्रशासन फिलहाल कई विकल्पों पर काम कर रहा है।
-इनमें सामान्य अस्पताल के साथ लगती निजी जमीन को अधिगृहीत किया जा सकता है। यह सरकार के लिए काफी महंगा होगा।
-अस्पताल में बने भवनों का निरीक्षण किया जाए। जो भवन मेडिकल कॉलेज के मानकों में बाधा बनते हैं, उन्हें तोड़ दिया जाए।
-अस्पताल के साथ लगती करीब आठ एकड़ वन विभाग की जमीन है। इस पर हर्बल पार्क बना है। जिस पर भी विचार चल रहा है।
-एक साइट के रूप में सामान्य अस्पताल से कुछ दूर पीडब्लूडी कॉलोनी को भी देखा जा रहा है। लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए रास्ते की दिक्कत आ रही है। अस्पताल और पीडब्लूडी कॉलोनी के बीच में हुडा की मार्केट है।
-अस्पताल के साथ लगती पटवार भवन की करीब पांच एकड़ जमीन को भी साइट के रूप में देखा जा रहा है।
नए भवन की स्थिति जांची
चिकित्सकों की टीम ने सामान्य अस्पताल में निर्माणाधीन 100 बेड के अस्पताल की नई इमारत का भी निरीक्षण किया। इस दौरान मौजूदा भवन को मेडिकल कॉलेज के लिए किस प्रकार प्रयोग किया जा सकता है, इसकी संभावनाएं भी जांची।
मील का पत्थर साबित होगा मेडिकल कॉलेज
शहर में मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। इससे जिलावासियों को उच्च स्तर की स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, वहीं युवाओं को रोजगार के अवसर पर मिलेंगे।
फिलहाल स्वास्थ्य सुविधाओं की बात की जाए, तो स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर प्राथमिक चिकित्सा तक ही सीमित है। महिलाओं की डिलवरी के लिए ज्यादातर केस में रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया जाता है।
चिकित्सकों की भी भारी कमी है तथा सामान्य अस्पताल में दिनभर महज 20 से 25 अल्ट्रासाउंड हो पाते हैं। ऐसे में जिलावासियों को निजी अस्पतालों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है।
मानकों के अनुसार मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए कम से कम 20 एकड़ जमीन की जरूरत होती है। प्रशासन के प्रस्ताव के अनुसार यह जमीन पूरी नहीं है। हालांकि कुल जमीन पूरी है, लेकिन इसमें से बहुत कम जमीन खुली है। ऐसे में प्रशासन जमीन मुहैया करवाएगा।
डॉ. राकेश गुप्ता, निदेशक पीजीआई रोहतक।