जींद। नागरिक अस्पताल में चल रहे निर्माण पर लगातार सवालिया निशान उठ रहे हैं। इसके बावजूद भी पीडब्ल्यूडी अस्पताल में चिकित्सकों की जरूरत के अनुसार सुविधाएं देने से पीछे हट रहा है। अब इमरजेंसी में चिकित्सकों के बैठने व मरीजों को एडमिट करने के केबिन जरूरत से ज्यादा छोटे बना दिए जिन्हें चिकित्सकों ने दोबारा बनाने की मांग की है।
नागरिक अस्पताल में लगभग 14.91 करोड़ रुपये की राशि से जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा है। इस निर्माण में अनियमितता बरतने की शिकायतों पर अस्पताल की शिकायत शाखा ने अधिवक्ता की शिकायत पर विजिलेंस को जांच के लिए पत्र लिखा है। अब अस्पताल की इमरजेंसी में बनाए गए केबिन को लेकर खुद चिकित्सकों ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह केबिन आवश्यकता से अधिक छोटे बना दिए गए। इसमें न तो ड्यूटीरत चिकित्सकों के बैठने का उपयुक्त स्थान है और न ही दाखिल किए मरीज को उपचार देने के लिए जरूरत के उपकरण बैड के साथ रखने का। इसको लेकर दो दिन पहले ही चिकित्सकों ने दौरा कर इसको हटवाने की मांग की थी ताकि दोबारा से जरूरत के अनुसार केबिन बनाए जा सकें।
अभी तक सेंट्रलाइज्ड एसी लगाने को लेकर भी निर्णय नहीं लिया जा सका। वहीं नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी का विस्तार किया जा रहा है। 10 बैड के इमरजेंसी वार्ड को बढ़ाकर 20 बैड का किया जा रहा है। अब इमरजेंसी में केबिन दोबारा बनाए जाने के कारण इमरजेंसी को शुरू होने में ज्यादा समय लगेगा।
केबिन बनवाने के निर्देश
इमरजेंसी में प्रतिदिन लगभग 300 की ओपीडी होती है। इसमें 50 से अधिक गंभीर मरीज आते हैं। रात के समय इमरजेंसी में ज्यादा मरीज होते हैं क्योंकि रात को जिले के अन्य अस्पतालों में शायद ही कोई सुविधा होती है। इनकी जरूरत के अनुसार अब केबिन बनवाने के निर्देश दिए हैं।
सुविधाएं शुरू होने का इंतजार बढ़ा
पुराने भवन में सुविधाएं शुरू होने का मरीजों का इंतजार बढ़ता जा रहा है। लगभग 25 दिन पहले भवन के रेनोवेशन का कार्य शुरू हुआ था। इस दौरान यह काम 17 दिन में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन काम पूरा नहीं होने के कारण इसकी तारीख बढ़ती चली गई।
वर्जन
पुराने भवन में तैयार की जा रही इमरजेंसी में बनाए गए चिकित्सकों व मरीजों के केबिन की जांच की तो यह निर्धारित साइज से छोटे मिले। अब इनमें सुधार के लिए पीडब्लयूडी से मांग की है ताकि मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके। इसके अतिरिक्त चिकित्सक भी आराम से बैठकर केबिन में मरीजों को देख सकें।-डॉ. रघुबीर पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल जींद।